छत्तीसगढ़

CG के इस जिले में हर गांव में 50-60 बच्चे डेंटल फ्लोरोसिस का शिकार:पानी में 8 गुना तक ज्यादा फ्लोराइड; 40 गांवों के रिमूवल प्लांट बंद

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के गांवों में बच्चे डेंटल फ्लोरोसिस का शिकार हो रहे हैं। यह बीमारी पानी में फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा से होती है। इसे कंट्रोल करने के लिए जिले के 40 गांवों में 6 करोड़ की लागत से प्लांट तो लगाए गए लेकिन वह कुछ महीने में ही बंद हो गए।

इन प्रभावित गांवों में हर साल 100 से ज्यादा स्कूली छात्रों को डेंटल फ्लोरोसिस होता है। फिलहाल, इन गांवों में 50 से 60 बच्चे डेंटल फ्लोरोसिस से ग्रसित मिले। वहीं देवभोग ब्लॉक के गांवों में कुल पीड़ितों की संख्या 2 हजार से भी ज्यादा है।

साल 2016 में शासन-प्रशासन को जांच में फ्लोराइड ज्यादा होने की जानकारी लगी। देवभोग ब्लॉक के 40 गांव के स्कूलों में जो पेयजल सप्लाई हो रही है वहां 8 गुना तक ज्यादा फ्लोराइड था। प्रशासन ने कार्य योजना बना कर सभी प्रभावित स्कूलों में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने का फैसला लिया।

50 से 60 बच्चों के दांत पीले

रिपोर्ट के बाद इन सोर्स को न तो बंद कराया गया न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। पड़ताल में पता चला कि हेवी फ्लोराइड वाले ग्राम नांगलदेही, पीठापारा, दरलीपारा, गोहरापदर, झाखरपारा, घूमगुड़ा, धुपकोट, मोखागुड़ा, निष्टिगुड़ा, सुकलीभाठ, मूरगुडा, खम्हारगुड़ा, माहुकोट, पूरनापानी, बरबहली, बाड़ी गांव, कर्चिया, धौराकोट, मूड़ागाव, मगररोडा जैसे प्रत्येक गांव में 50 से 60 बच्चे डेंटल फ्लोरोसिस से ग्रसित मिले।

सभी की उम्र 6 से 10 साल की है। जानकारी के मुताबिक देवभोग ब्लॉक में इनकी संख्या 2 हजार से ज्यादा है। मामले में देवभोग अस्पताल में पदस्थ डेंटिस्ट डॉक्टर सनी यादव ने कहा कि फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने से डेंटल फ्लोरोसिस होता है। दांत में पीलापन इसकी पहचान है।

हड्डियों को प्रभावित करता है फ्लोराइड

डॉक्टर ने कहा कि ये लाइलाज रोग है। फ्लोराइड की मात्रा समय रहते कम नहीं की गई तो फ्लोराइड हड्डियों को प्रभावित करता है।आगे चल कर किडनी रोग, बदन में अकड़न, बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बड़ों के हड्डियों में झुकाव, कमर बैंड होना भी फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा के लक्षण में शामिल है।

फिल्टर मशीन तक निकाल ले गए

धौराकोट, मगररोड़ा, गाड़ाघाट, कांडपारा, पीठापारा के प्रधान पाठकों ने बताया कि बंद प्लांट को शुरू कराने के लिए कई बार कोशिश हुई। ठेकेदार के मुनीम से लेकर पीएचई विभाग के इंजीनियर तक को सूचित किया गया, लेकिन कोई सुध लेने नहीं आया।

मगररोड़ा प्राथमिक मिडिल स्कूल के प्लांट में ताला लटका था। अंदर कांटे भर दिए गए थे। धौराकोट, गाड़ाघाट, कुसकोना, डूमरपीठा, चीचिया, माहुलकोट, मूंगीया के प्लांट से पंप और फिल्टर मशीन तक कंपनी के लोग निकाल ले गए। कांडपारा, नांगलदेही, पुरनापानी, धूपकोट जैसे 10 से ज्यादा स्कूलों के सोलर प्लेट क्षतिग्रस्त मिले।

अब फिर लगाया गया टेंडर

बताया जा रहा है कि, भारी मात्रा में फ्लोराइड को साफ करने के चलते इन प्लांट को लगातार मेंटेनेंस की जरूरत होती है। काम पूरा होने के बाद इसका रखरखाव 2-3 विभागों के बीच फंस गया। इसके बाद कुछ महीनों में एक-एक कर प्लांट बंद हो गए।

पीएचई विभाग के एसडीओ सुरेश वर्मा ने कहा है कि वर्तमान ईई इन प्लांट को लेकर गंभीर हैं। उन्हें जैसे पता चला, प्लांट मेंटेनेंस की कार्य योजना बनाकर बजट पास कराया गया है। अब टेंडर लगाए जा चुके हैं। जल्द ही सभी प्लांट के मेंटेनेंस काम शुरू कर दिए जाएंगे।

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