छत्तीसगढ़

भिलाई के कैंप 1में  BSP की टीम ने 30 साल अवैध कब्जे पर की बड़ी कार्यवाही घर को किया सील  इसके बाद कब्जाधारी ने इस कार्यवाही को गलत और द्वेशपूर्ण बताते हुए सील को तोड़कर वापस वहां सामान रख दिया।

By Dinesh chourasiya

भिलाई स्टील प्लांट के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट की टीम शनिवार को शास्त्री नगर कैंप 1 में 30 साल पुराने कब्जा को मुक्त कराने पहुंची। BSP की टीम ने घर से सारा सामान निकालकर सड़क पर रख दिया और घर को सील कर दिया। इसके बाद कब्जाधारी ने इस कार्रवाई को गलत और द्वेशपूर्ण बताते हुए सील को तोड़कर वापस वहां सामान रख दिया।

बीएसपी के अधिकारियों का कहना है कि सील तोड़कर सामान रखना गैर कानूनी कृत्य है। वो इसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराएंगे। कार्रवाई करने पहुंचे बीएसपी के अधिकारियों ने बताया कि शास्त्री नगर कैंप 1 में नेशनल हाइवे से लगी बीएसपी की जमीन पर पिछले 30 सालों से बेजा कब्जा था।

कार्रवाई के दौरान बीएसपी के अधिकारियों कर्मचारियों से जमकर हुआ विवाद

साबुन और मशाला फैक्ट्री पर किया गया था अवैध कब्जा

बीएसपी के अधिकारियों ने कहा कि यहां पहले कुछ महिला समूहों द्वारा साबुन और मशाला बनाने का काम किया जाता था। इसके बाद इस जमीन पर राघवेंद्र सिंह के पिता ने कब्जा कर लिया। बीएसपी ने 30 सालों से इस बेजा कब्जा को खाली कराने के लिए नोटिस दिया तो वो लोग हाईकोर्ट चले गए थे। बीएसपी अधिकारियों का कहना है कि हाइकोर्ट ने उनके केस को खारिज कर दिया। इसके बाद बीएसपी के संपदा न्यायालय ने इस परिसर को खाली कराने का आदेश दिया और वो कार्रवाई करने पहुंचे थे।

फैक्ट्री में बना लिया गया था आवास

इस बंद फैक्ट्री में 30 सालों से राघवेंद्र सिंह का कब्जा था। वो लोग यहां रह रहे थे। शनिवार दोपहर बीएसपी इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट के जीएम केके यादव और तहसीलदार श्यामलाल साहू मह दल बल के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने फैक्ट्री के अंदर बने कमरों में रखे बेड फर्नीचर, आलमारी सहित अन्य सामानों निकाल कर बाहर सड़क में रख दिया। इसके बाद बीएसपी की टीम पूरे मकान को सीलकर चली गई।

कार्रवाई के दौरान अंदर से सामान निकालकर सड़क पर रखती बीएसपी की टीम

कार्रवाई के दौरान जमकर हुआ विवाद

बीएसपी के अधिकारी कार्रवाई करने पूरे दल बल के साथ पहुंचे थे, लेकिन कब्जा धारकों ने उनका काफी विरोध किया। इस दौरान उनके द्वारा जमकर गाली गौलज और चेतावनी दी गई। बाद में बीएसपी के अधिकारियों ने सारा सामान सड़क पर छोड़ा और सील लगाकर चले गए। कब्जाधारी ने सील को तोड़ दिया और कमरों में फिर से सामान रखकर अपना कब्जा काबिज कर लिया।

सील कार्रवाई के बाद फिर से सामान रखकर किया गया कब्जा

एक कब्जे पर कार्रवाई, दूसरे पर नहीं

कब्जाधारकों का कहना है कि वो लोग यहां 30 साल से काबिज हैं। उनके ठीक बगल से उसी परमाइसिस में एक और कब्जेदार रहते हैं। दोनों का केस हाईकोर्ट में लगा है। बीएसपी आपसी रंजिश के चलते केवल उन्हीं का कब्जा खाली करवाने पहुंची थी।

इस पर बीएसपी के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे कब्जाधारक का स्टे खारिज नहीं हुआ है। इनका हुआ तो इन पर कार्रवाई की गई है। बगल वाले का भी स्टे खारिज होते ही उसके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।

एक करोड़ से अधिक की बताई जा रही पैनाल्टी

बीएसपी के अधिकारियों का कहना है कि कब्जेदार के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी हो गया था। उसके बावजूद, भवन खाली नहीं हो रहा था। अब बीएसपी ने बड़ा एक्शन लेते हुए परिसर को खाली करा लिया है। बीएसपी के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट का कहना है कि कब्जेदार से करीब एक करोड़ से अधिक की पेनाल्टी वसूली जाएगी।

बीएसपी की कार्रवाई के खिलाफ पत्रकार करेंगे आंदोलन

बीएसपी ने ये जो कार्रवाई की है वो राघवेंद्र सिंह के कब्जे में थी। राघवेंद्र सिंह पेशे से पत्रकार हैं। उनका कहना है कि उनके ऊपर ये कार्रवाई पूरी तरह से द्वेशपूर्ण हुई है। इसे लेकर भिलाई के सभी पत्रकार एक हो गए हैं। वो लोग बीएसपी अधिकारी केके यादव के खिलाफ आंदोलन करेंगे और अपराध भी दर्ज कराएंगे।

सिटी प्रेसक्लब के महसचिव दिनेश चौहान और कोषाध्यक्ष नीलेश त्रिपाठी ने शाशन और प्रशासन के संज्ञान मे इस मामले को लाया है। सिटी प्रेसक्लब के अध्यक्ष आनंद नारायण ओझा ने कहा की पत्रकारों के क्लब का एक फोरम है।

पहले भी हम लोग बकाया पेड करवाएं हैं। केके यादव की दबंगई अब बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने बीएसपी के अन्य अधिकारियो को भी इस मामले मे गुमराह किया है। इसलिए उनके खिलाफ आंदोलन कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

पत्रकार विरादरी को भयभीत करने का प्रयास

पत्रकार आनंद ओझा ने बताया कि बीएसपी ने वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र सिंह के खिलाफ द्वेश पूर्ण कार्रवाई करके गलत किया है। शास्त्री नगर कैंप 1 के जिस मकान पर यह कार्रवाई की गई है। वह मकान राघवेंद्र सिंह के पिता स्व. डीसी सिंह की देखरेख में सालों से रहा है। वह बीएसपी के पूर्व कर्मचारी थे। इस मकान का मामला हाईकोर्ट मे भी चल रहा है। उसके बाद भी केके यादव ने कार्रवाई की है। इससे भिलाई के पत्रकार बिरादरी को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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