
CG में तबाही मचाएगा मानसून! आज से इन 9 जिलों में होगी ताबड़तोड़ बारिश, IMD का अलर्ट जारी…अब तक 3 की मौत
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून की एक्टिविटी तेज हो गई है। मौसम विभाग ने आज रायपुर, बालोद, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
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9 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 9 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे में रायपुर, बालोद, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा और सुकमा में भारी बारिश हो सकती है। वहीं 6 जिलों नारायणपुर, बीजापुर, राजनांदगांव, कांकेर, मोहला-मानपुर और खैरागढ़ (Rain Alert) के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

Monsoon 2024: प्रदेश में 5 दिनों का मौसम

बिलासपुर में कुछ दिन तेज बारिश के आसार
आकाशीय बिजली गिरने से 3 मौतें
यहां दर्ज हुई इतनी बारिश
महासमुंद में 302, सरायपाली में 239.6, बसना में 276, पिथौरा में 200, बागबाहरा में 218, कोमाखान में 156.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। 19 जुलाई को महासमुंद, सरायपाली, पिथौरा में एक मिमी, बसना में तीन, बागबाहरा में 19 मिमी, कोमाखान में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार को सुबह तेज धूप खिली। दोपहर के बाद आसमान में बादल छाने के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। शाम पांच बजे के बाद भी कुछ देर (Monsoon Update CG) तक मूसलाधार बारिश हुई। एक जून से अब तक 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। प्रतिवर्ष 19 जुलाई की स्थिति में 374 मिमी वर्षा हो जाती है, लेकिन इस वर्ष कम बारिश हुई है।








अब तक औसत से 63 प्रतिशत बारिश हुई है। महासमुंद तहसील में 34 प्रतिशत, सरायपाली 37, बसना 27 प्रतिशत, पिथौरा में 41 प्रतिशत, बागबाहरा में 33 प्रतिशत, कोमाखान में 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इधर, किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है। क्योंकि, रोपाई का कार्य पिछड़ गया है। जिन किसानों धान की बोआई कर दी है, उन्हें अब बियासी के लिए मूसलाधार बारिश होने का इंतजार है। देखा जाए तो पिछले कुछ दिनों से जिले में खंड वर्षा हो रही है। इस वर्ष 993 मिमी बारिश होने का अनुमान है। हर साल सावन महीने में बारिश का कोटा पूरा होता है। दो दिन बाद सावन माह लगने वाला है।
बारिश के बाद सड़कें बदहाल
बारिश के बाद सड़कों की सूरत बदल चुकी है। बारिश के पहले जहां की सड़कें खराब थी, उसकी हालत अब बदतर हो गई है। पैदल चलना भी मुश्किल है। डामर की परत उखड़ गई है। जगह-जगह जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर जाता है। फिर चालकों को वाहन चलाने में दिक्कत होती है।









