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उद्घाटन से पहले नदी में समाया 12 करोड़ का पुल दो इंजीनियर सस्पेंड, एजेंसी ब्लैकलिस्टेड; गडकरी बोले-बिहार सरकार के मंत्रालय के अंदर चल रहा था काम

By Dinesh chourasiya

बिहार में ​​​अररिया के सिकटी में बकरा नदी पर बना पुल मंगलवार को नदी में समा गया। इस पुल को उद्घाटन का इंतजार था। पुल 12 करोड़ रुपए की लागत से बना था। पिछले 13 साल में यह पुल तीसरी बार बन रहा था।

इस मामले में दो इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया गया है।

गडकरी ने X पर बताया- जिम्मेदार कौन

वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, बिहार के अररिया में दुर्घटनाग्रस्त पुलिया का निर्माण केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत नहीं हुआ है। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत इसका काम चल रहा था।

एक्शन में आई सरकार

ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सहायक अभियंता अंजनी कुमार एवं कनीय अभियंता मनीष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

साथ ही निर्माणाधीन पुल के संवेदक सिराजुर रहमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर काली सूची में डालने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

पिछले 13 साल में यह पुल तीसरी बार बन रहा था।

जांच रिपोर्ट 7 दिनों में सौंपने का निर्देश

मंत्री अशोक चौधरी के निर्देश पर मुख्य अभियंता पूर्णिया की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया गया है। जांच दल को पुल के फाउंडेशन की गहराई, फाउंडेशन, सब स्ट्रक्चर एवं सुपर स्ट्रक्चर में प्रयुक्त सामग्रियों की मात्रा, गुणवत्ता एवं कराए गए कार्य के वर्कमैनशिप की डिटेल जांच कर रिपोर्ट 7 दिनों के अंदर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है।

दोषियों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई

अशोक चौधरी ने कहा कि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने के बाद उन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित सभी संलिप्त व्यक्तियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी भी दर्ज की जाएगी।

पुल के 3 पिलर नदी में समा गए

मंगलवार को पुल के 3 पिलर नदी में समा गए। पुल बनाने वाली कंपनी के लोग मौके पर पहुंच गए हैं। प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं।

सिकटी विधायक ने लापरवाही का आरोप लगाया

सिकटी विधायक विजय मंडल ने आरोप लगाया निर्माण कंपनी के मालिक की लापरवाही के कारण पुल टूटा है। प्रशासन इसकी जांच कराए।

पिलर्स खिसकने के कारण गिरा पुल

ग्रामीण कार्य विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आशुतोष कुमार ने कहा कि जांच के बाद संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नदी का बहाव क्षेत्र बढ़ा तो पिलर्स खिसक गए। इस कारण पुल गिरा है।

कुछ दिन पहले स्थानीय लोगों ने दो पिलर्स के बीच में नदी की धारा को मोड़ने के लिए मिट्‌टी की कटिंग की थी। इसकी वजह से गड्ढा हुआ और पिलर्स कमजोर हो गए।

अधिकारियों का कहना है कि गांव वालों ने नदी की धारा मोड़ी जिससे पिलर्स कमजोर हुए।
अररिया के सिकटी में बकरा नदी पर बना पुल मंगलवार को नदी में समा गया।

13 साल से बन रहा है पुल
बकरा नदी की धारा लगातार बदलते रहने और पुल निर्माण की तकनीकी खामियों के चलते काशी-कामख्या ऐतिहासिक सड़क पर अररिया-किशनगंज के बीच पिछले 13 साल में आवागमन चालू नहीं हो सका है। सड़क के बीच में आने वाली बकरा नदी पर सिकटी के पड़रिया धार में पुल बनना शुरू होते ही नदी ने दो बार धारा बदल ली। इसलिए पुल बेकार हो गया। अब तीसरी जगह पर पुल बनाया गया था। पिछले 13 वर्षों में पुल निर्माण के लिए 43 करोड़ की स्वीकृति मिली है।

बारिश के अलावा 8 महीनों के दौरान लोग पैदल निकल जाते हैं लेकिन बरसात के चार महीने सिकटी के लोगों को कुर्साकांटा आने में 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। पुल बनने से किशनगंज के टेढ़ागाछ प्रखंड से भी सीधा जुड़ाव हो जाता।

स्थानीय विधायक विजय कुमार मंडल ने कहा कि निर्माण कंपनी के मालिक और विभाग के अधिकारी की लापरवाही के कारण पुल ढहा है। तय मापदंड के अनुसार काम नहीं हुआ है। जिसके कारण ये पुल टूटा है। प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दोषी को जेल भेजा जाना चाहिए।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि उद्घाटन से पहले ही पुल टूट गया है। इससे क्या उम्मीद कर सकते हैं। बिहार अंदर संस्था में किस तरह से भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। कई ऐसे उदहारण रहे हैं, जिसमें कई पुल नदी में समा गए हैं। हमलोग लगातार इस पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे कंपनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए या जो पदाधिकारी काम करवा रहे हैं, जो इंजीनियर हैं। बिना उनकी मिलीभगत के ये संभव नहीं है।

सिकटी-कुर्साकांटा के गांवों को लाभ मिलता
पड़रिया घाट पर पुल बनता तो सिकटी प्रखंड के खारदह, ठेंगपुर, सातवेर, परड़िया, कौआकोह, बेलबाड़ी, ढेंगरी, बरदाहा, भिडभिडी, मसूण्डा नेमुआ पीपरा गांवों व कुर्साकांटा प्रखंड के परड़िया, डहुआबाड़ी, कुर्साकांटा, बखरी गांव के लोगों को सीधा लाभ होता।

2011 में पहली बार, 2019 में दूसरी बार पुल के पिलर बने
2011 में पुल निगम ने बकरा नदी का पड़रिया घाट पर पुल निर्माण के लिए 11 करोड़ की स्वीकृति दी। पुल में चार पिलर बनने थे। तीन पिलर बनने के बाद नदी की धारा दूर चली गई। इसके बाद 2018 में पुल निर्माण को लेकर जगह बदली गई। फिर से 12 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हुई। दूसरी बार स्वीकृति मिलने के बाद पहले से बन रहे पुल से ही सटाकर चार पिलर बनाए गए। ये 2019 जून में तैयार हो गए। इसके बाद फिर बकरा नदी की धारा बदल गई।

तीसरी बार करीब 12 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। इस राशि से 181 मीटर लंबा 8 पिलर का पुल बनना था। तीसरा पुल जून 2020 तक बन जाना था लेकिन बाढ़ और कोविड के कारण काम में देरी हो गई। फिर नदी की धारा को मोड़कर यहां लाने की योजना बनाई गई।

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