
भिलाई स्टील प्लांट के अंदर प्रवेश करने पर 19 जून से क्यूआर अनिवार्य, कर्मी विरोध में उतरे
By Dinesh chourasiya
बीएसपी प्रबंधन 6 महीने पहले शुरू किए गए क्यूआर कोड को लेकर 19 जून से सख्ती करने जा रहा है। इसे लेकर आदेश जारी होते ही कर्मी भड़क उठे। कर्मियों के आक्रोश को देखते हुए यूनियन नेताओं ने जीएम सेफ्टी का घेराव कर दिया।
जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि सीआईएसएफ जवानों को निर्देश देकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच के नाम पर कर्मियों को परेशान न किया जाए। साथ ही प्रवेश द्वारों में कर्मियों की लंबी कतार न लगे। 6 महीने पहले बीएसपी प्रबंधन ने क्यूआर कोड लागू किया।







इसे स्कैन करने पर वाहन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आ जाती है। प्रबंधन को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि प्लांट के अंदर लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने पर चालक को पकड़े जाने की स्थिति में कई बार ऐसी भी स्थिति निर्मित हुई वाहन से जुड़ी दस्तावेज ही नहीं थे।
ऐसी और भी खामियां सामने आई जो प्लांट के अंदर रोड सेफ्टी के लिए ठीक नहीं थी। इसे देखते हुए ही सभी कार्मिकों के लिए क्यूआर कोड लागू किया गया। 6 महीने पहले भी जब प्रबंधन ने इसे लागू किया, यूनियन नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि क्यूआर कोड की जांच के नाम पर सीआईएसएफ के जवान कर्मियों से दुर्व्यवहार करते हैं। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। जिसके बाद प्रबंधन ने भी आदेश को शिथिल कर दिया था।
यानि सीआईएसएफ जवान बीच-बीच में ही क्यूआर कोड स्कैन कर वाहन से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर रहे थे। लेकिन मंगलवार को प्रबंधन ने आदेश जारी कर 19 जून से इसे सख्ती से लागू करने का फरमान जारी कर दिया है। यूनियन फिर इसके विरोध में हैं।




इस व्यवस्था से विवाद बढ़ा तो प्रबंधन जिम्मेदार: इंटक
क्यूआर कोड को सख्ती से लागू करने की जानकारी मिलते ही इंटक के नेतृत्व में कर्मियों ने जीएम सेफ्टी जीपी सिंह का घेराव कर दिया। इस दौरान उन्होंने क्यूआर कोड के औचित्य पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने जीएम सेफ्टी से कहा कि क्यूआर कोड की अनिवार्यता क्यों है उन्होंने कहा कि यदि इसके कारण प्लांट गेट पर कर्मचारियों की लंबी लाइन लगी एवं सीआईएसएफ द्वारा अभद्रता किया गया तो विवाद की स्थिति निर्मित होगी जिसके लिए पूरी तरह से प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
प्लांट में सड़क हादसे एक तिहाई कम हुए: सीजीएम
सीजीएम ने कहा कि क्यूआर कोड लगाने का उद्देश्य यह है कि प्लांट के अंदर रोड सेफ्टी के लिए असुरक्षित तरीके से वाहन चलाने वालों की जांच की जाती है एवं अलग-अलग कैमरों से निगरानी की जाती है। यह देखा गया है कि कई बार गाड़ियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है। जिसके कारण हम वाहन चालक का पता नहीं लगा पा रहे हैं। इस तरह की जांच के बाद प्लांट के अंदर सड़क हादसों में एक तिहाई तक की कमी आई है। इसे शून्य पर ला सकते हैं।





