छत्तीसगढ़

रिसाली निगम भिलाई में चल रहा टेंडर का अनोखा खेल:कम दर वाले को आदेश न देकर अनुभवहीन को दे रहे अधिक दर में काम

By Dinesh chourasiya

नगर पालिक निगम रिसाली में इन दिनों नियम कायदों को ताक में रखकर चहेतों को टेंडर देने का खेल खेला जा रहा है। ऐसा ही कुछ सफाई कार्य के लिए हुए टेंडर में किया गया है। इस काम के लिए जिस एजेंसी ने कम दर पर निविदा डाली है उसे काम न देकर सबसे अधिक दर वाली एजेंसी को काम देने की तैयारी है। इतना ही नहीं उस एजेंसी के पास नियमानुसार तीन साल का सफाई कार्य करने का अनुभव भी नहीं है।

जानकारी के अनुसार रिसाली नगर निगम ने 40 वार्डों में से 25 वार्डों के लिए सफाई कार्य की निविदा 14 फरवारी 2023 को तीन ग्रुप में जारी की थी। इसमें ग्रुप 2 में 1 करोड़ 86 लाख 30 हजार, ग्रुप तीन में 1 करोड़ 44 लाख 90 हजार और ग्रुप चार के लिए 1 करोड़ 86 लाख 30 हजार रुपए की निविदा जारी की गई थी। इन निविदाओं में मेसर्स एलमेक टेक्नोक्रेट्स, ज्योति ट्रेडर्स और मेसर्स रविंद्र प्रसाद क्वालीफाई किए थे और शंभू सिंह, अर्पित एसोसिएट और राम एसोसिएट को अनुभव कम होने व अन्य कारण डिसक्वालीफाई कर दिया गया था।

तीन क्वालीफाई निविदा धारकों में सबसे कम दर एलमेक टेक्नोक्रेट्स ने 1 करोड़ 86 लाख 92 हजार 786 रुपए वार्षिक डाली थी। वहीं दूसरे नंबर पर सबसे कम दर ज्योति टेडर्स ने 1 करोड़ 93 लाख 90 हजार रुपए वार्षिक डाला था। सबसे अधिक दर रविंद्र प्रसाद ने 16 लाख 30 हजार रुपए प्रतिमाह दर डाली थी। इसकी वार्षिक दर 1 करोड़ 95 लाख 60 होती है। सबसे अधिक दर होने के बाद भी रविंद्र प्रसाद को निगम आयुक्त ने आदेश जारी करने के लिए ईई राजकुमार जैन को निर्देशित कर दिया है।

जिस एजेंसी को कर रहे क्वालीफाई उसने दिया 22 महीने का अनुभव
जिस एजेंसी को कर रहे क्वालीफाई उसने दिया 22 महीने का अनुभव

‘मेसर्स रविंद्र प्रसाद के पास नहीं पर्याप्त अनुभव’
निविदा नियमावली की कंडिका 27(8) में स्पष्ट रूप से दिया गया है कि टेंडर धारक के पास सफाई कार्य के लिए समान प्रकृति के कार्य का 3 साल का अनुभव होना अनिवार्य है। वहीं कंडिका 27 (7) में दिया गया है कि निविदादाता को साल 2021-22 में कार्य की लागत का 60 प्रतिशत टर्न ओवर होना अनिवार्य है। ऑनलाइन निविदा के डॉक्यूमेंट्स को देखा जाए तो रविंद्र प्रसाद के पास समान प्रकृति के कार्य का मात्र 22 महीने का अनुभव है। शेष अनुभव उसने सिविल कार्य का दिया गया है, जो कि समान प्रकृति में नहीं आता है।

वहीं यदि निविदा दर के 60 प्रतिशत के टर्न ओवर को देखा जाए तो ये सवा करोड़ के आसपास पहुंचता है, लेकिन रविंद्र प्रसाद के पास केवल 1 करोड़ का ही टर्न ओवर है। यह उन्होंने अपने शपथ पत्र में लिखकर दिया है। इसके बाद भी उसे डिसक्वालीफाई नहीं किया है।

ऑनलाइन नियम और आयुक्त के बयान में बड़ा अंतर
सफाई कार्य के टेंडर की बात की जाए तो ऑनलाइन में यह सुविधा दी गई थी कि टेंडर धारक को साल भर की एकमुश्त दर प्रस्तुत करनी थी। यह इनके नियम शर्तों के पेज 1 में लिखित है। वहीं निगम आयुक्त आशीष देवांगन का कहना है कि निविदा मासिक दर में मांगी गई थी। बाकी लोगों ने वार्षिक दर में निविदा रेट डाला है। इसलिए मासिक दर वाली एजेंसी को कार्य दिया जा रहा है। वहीं कार्यपालन अभियंता राजकुमार जैन का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, जो कर रहे वह आयुक्त कर रहे हैं। उन्हीं से जानकारी मिल पाएगी।

आशीष देवांगन, आयुक्त नगर पालिक निगम रिसाली
आशीष देवांगन, आयुक्त नगर पालिक निगम रिसाली

निविदा दर को माना भी नहीं और डिसक्वालीफाई भी नहीं किया
आयुक्त आशीष देवांगन एक तरफ यह कह रहे हैं कि उन्होंने निविदा की दर मासिक में मांगी थी। वहीं उन्होंने वार्षिक दर भरने वालों को डिसक्वालीफाई भी नहीं किया है। ऐसा इसलिए नहीं किया गया कि यदि उन्हें डिसक्वालीफाई किया जाता तो रविंद्र प्रसाद अकेले क्वालीफाई निविदा धारक बचते और एकल निविदा होने से उन्हें फिर से टेंडर कॉल करना पड़ता। जबकि टेंडर नियम कुछ और ही कह रहा है।

मामला कोर्ट तक ले जाने की तैयारी
एलमेक टेक्नोक्रेट्स के डायरेक्टर जहीर खान ने बताया कि टेंडर में हमारी संस्था की दर न्यूनतम है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन नियमानुसार की गई है। नगर निगम रिसाली उच्चतम दरदाता को किस आधार पर कार्य देना चाह रही है, यह समझ से परे है। अगर हमारी संस्था को कार्यादेश जारी नहीं किया जाता है तो इसका अर्थ है कि नगर निगम के सक्षम अधिकारी निगम को लगभग 38 लाख 83 हजार 628 रुपए की क्षति पहुंचाएंगे। यह भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितता है। यदि ऐसा हुआ तो हम इसके खिलाफ न्यायालय की शरण में जाएंगे।

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