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CG शराब-घोटाला केस टुटेजा के घर CBI का छापा:रायपुर में 6 से ज्यादा अफसर खंगाल रहे दस्तावेज, 3 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट से मिली थी बेल

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले केस में जेल बंद रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा के रायपुर स्थिति घर पर CBI ने छापा मारा है। बताया जा रहा है एजेंसी 2000 करोड़ के शराब घोटाले की जांच कर रही है। टीम में 6 से ज्यादा अधिकारी शामिल हैं। हालांकि कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अनिल टुटेजा को जमानत दी है। ये जमानत छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में मिली है। हालांकि, पासपोर्ट जमा कराने समेत कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। मंगलवार को जमानत आवेदन पर सुनवाई जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बैंच में हुई।

हालांकि, अनिल टुटेजा को ED के केस में राहत मिली है। अभी इसी केस पर EOW जांच कर रही है। ऐसे में टुटेजा जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं आ पाए। वह पिछले एक साल से जेल में बंद हैं।

रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा के रायपुर स्थिति घर पहुंची CBI की टीम। खंगाल रहे दस्तावेज।

जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी टुटेजा को बेल ?

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें टुटेजा के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोप तय करने से पहले सरकार से अनुमति (CrPC की धारा 197 के तहत) नहीं ली गई थी।

धारा 197 के अनुसार, यदि कोई सरकारी अफसर अपने कार्य के दौरान किसी अपराध का आरोपी है, तो कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए पहले सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होता है।

जमानत की शर्तें और प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को आदेश दिया कि टुटेजा को जमानत की प्रक्रिया के लिए संबंधित कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष न्यायाधीश की अदालत अभी खाली है। इसके अलावा शर्तों में, पासपोर्ट सरेंडर करना और अदालत में सुनवाई के दौरान पूरा सहयोग करना शामिल है।

ED के वकील ने जमानत में विरोध में दिया ये तर्क

ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि, अनिल टुटेजा एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। जो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कोर्ट में टुटेजा पर नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले में भी शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि वे गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए सक्षम हैं।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

इन्हें बनाया गया आरोपी

ED ने विशेष न्यायाधीश को चालान के संबंध में बताया कि शराब घोटाले में अब तक कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम सांई ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई

  • पार्ट-A कमीशन: CSMCL यानी शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय द्वारा उनसे खरीदी गई शराब के प्रति ‘केस’ के लिए डिस्टिलर्स से रिश्वत ली जाती थी।
  • पार्ट-B कच्ची शराब की बिक्री: बेहिसाब ‘कच्ची ऑफ-द-बुक’ देसी शराब की बिक्री हुई। इस मामले में सरकारी खजाने में एक भी रुपया नहीं पहुंचा और बिक्री की सारी रकम सिंडिकेट ने हड़प ली। अवैध शराब सरकारी दुकानों से ही बेची जाती थी।
  • पार्ट-C कमीशन: शराब बनाने वालों से कार्टेल बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी दिलाने के लिए रिश्वत ली जाती थी। FL-10 A लाइसेंस धारकों से कमीशन ली गई, जिन्हें विदेशी शराब के क्षेत्र में कमाई के लिए लाया गया था।

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