भिलाई के खुर्सीपार से बीएसपी ने हटाया अवैध कब्जा, 250 से अधिक अभी भी कब्जा कार्य वाही कब तक
By Dinesh chourasiya

बीएसपी में अपनी संपत्ति के कब्जे को लेकर संपदा न्यायालय है। किसी भी कब्जेधारी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर न्यायालय का आदेश महत्वपूर्ण होता है। न्यायालय से आदेश पारित होने के बाद उसका पालन सुनिश्चित करना नगर सेवाएं विभाग के इन्फोर्समेंट विभाग का होता है।
लेकिन प्रबंधन के सलेक्टिव रवैए के कारण संपदा न्यायालय द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद भी वर्षों से 250 से अधिक कब्जेधारियों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जिसके कारण इनफोर्स मेंट विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इधर शुक्रवार को खुर्सीपार में कब्ज हटाने की कार्रवाई की गई।







विधानसभा चुनाव के कारण बीएसपी प्रबंधन ने लिखित आदेश तो नही निकाला था लेकिन मौखिक तौर पर निर्देश दिए गए थे कि कब्जेधारियों के खिलाफ कार्रवाई को होल्ड किया जाए। लिहाजा इन्फोर्समेंट विभाग बीते दो महीने से छोटी-मोटी कार्रवाई को छोड़कर बड़े कब्जे को लेकर शांत ही रही। अब जबकि मतदान हो चुका है विभाग एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इसी तारतम्य में एक दिसंबर को खुर्सीपार क्षेत्र में सड़क किनारे अवैध रूप से कब्जा कर अवैध निर्माण कर रहे कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बेदखली अभियान चलाया। इसके 2-3 दिन पूर्व उतई रोड में और मरोदा स्थित शिवपारा में अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। लेकिन नेवई में शॉपिंग कांप्लेक्स और ढाबा पर इन्फोर्समेंट टीम मेहरबान है बताया जाता है कि बड़े रसूख रखने वालों पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
एक दिसंबर को खुर्सीपार क्षेत्र में सड़क किनारे एम पीआर रोड, खुर्सीपार जोन-2 में शासकीय स्कूल के पास अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करते हुए बीएसपी की भूमि पर बन रहे 10×10 वर्ग फीट के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर हटाया गया। इसके पहले भी संयंत्र के इनफोर्स मेंट विभाग द्वारा उतई रोड में 10×30 वर्गफीट भूमि पर की अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया। ऐसी ही कार्रवाई मरोदा स्थित शिवपारा में दो स्थानों पर लगभग 30x 50 तथा 20×30 वर्ग फीट भूमि पर अवैध कब्जे को हटाया गया।
संपदा न्यायालय के कई आदेश 10 वर्षों से लंबित संपदा न्यायालय हर रोज एक न एक आदेश कब्जेधारियों के खिलाफ पारित करता है। इनफोर्स मेंट विभाग इनमें से छोटे-मोटे मामले में तत्काल कार्रवाई कर देता है लेकिन रसूखदारों के मामले में वह बैकफुट पर रहता है। यहीं वजह के संपदा न्यायालय द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद भी 250 से अधिक मामले में कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इनमें कई आदेश तो 5 से 10 वर्ष पहले जारी किए हुए हैं।











