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बिहार में सियासी उठापटक के संकेत, भाजपा से नाता बिहार में सियासी उठापटक के संकेत, भाजपा से नाता तोड़ने पर जदयू से हाथ मिलाने को तैयार राजदतोड़ने पर जदयू से हाथ मिलाने को तैयार राजद

पटना: और भारतीय जनता पार्टी के बीच मनमुटाव की अटकलों के बीच सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मौके की नजाकत को देखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपने दरवाजे खोल रखे हैं। राजद ने सोमवार को बयान जारी किया कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा के साथ संबंध तोड़ देते हैं तो राजद उन्हें और उनकी पार्टी को गले लगाने के लिए तैयार है।

जदयू ने मंगलवार को पटना में सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। इससे पहले 2017 में भी जब नीतीश कुमार महागठबंधन से निकलना चाह रहे थे तो इसी तरह से बैठक बुलाकर विधायकों और सांसदों से राय मशविरा किया था। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि इस बैठक में नीतीश कुमार यह देखना चाहते हैं कि आरसीपी सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद सारे विधायक उनके साथ हैं या नहीं? जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी कहा कि एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। मुख्यमंत्री विधायक दल के नेता हैं इसलिए संगठन को लेकर उन्होंने बैठक बुलाई है।

क्यों शुरु हुआ राजनीतिक बवाल
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अपनी ही पार्टी के नेता आरसीपी सिंह से संपत्ति को लेकर जवाब तलब किया था। इसका जवाब देने से पहले आरसीपी सिंह ने जेदयू छोड़ दिया और फिर सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। आरसीपी सिंह ने यहां तक कह डाला कि नीतीश कुमार अगले सात जन्म तक प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे।

इसके बाद से राजनीतिक पार्टियां रेस हो गई हैं। नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री द्वारा बुलाए गए नीति आयोग की बैठक में भाग नहीं लिया। इसके सथ ही ललन सिंह की ओर से आरसीपी सिंह के बहाने भाजपा पर हमला बोला गया। इससे संकेत मिल रहे हैं कि बिहार की राजनीति करवट ले रही है।

बिहार का राजनीतिक समीकरण
बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं। फिलहाल राजद के पास 79, भाजपा के पास 77, जदयू के 45, कांग्रेस के 19, लेफ्ट के 16, हम के 4, एआईएमआईएम और निर्दलीय के 1-1 विधायक हैं। यहां जादुई नंबर 122 है और एनडीए में अभी भाजपा के 77, जदयू के 45, हम के 4 और एक निर्दलीय सहित कुल 127 विधायक हैं।

महागठबंधन में फिलहाल 114 विधायक हैं जिसमें राजद के 79, कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के विधायक शामिल हैं। नीतीश से हाथ मिलाने के बाद इनकी संख्या 159 हो जाएगी

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि मंगलवार को दोनों दलों द्वारा विधायकों की बैठक बुलाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थिति असाधारण है। उन्होंने ये भी कहा कि मौजूदा घटनाक्रम के बारे में व्यक्तिगत रूप से उन्हें कुछ पता नहीं है। लेकिन, इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि दोनों दलों ने उस समय ऐसी बैठकें बुलाई हैं, जब विधानसभा का सत्र संचालन में नहीं है। शिवानंद तिवारी ने साफ किया कि राजद भाजपा से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर मुख्यमंत्री इस लड़ाई में शामिल होने का फैसला करते हैं तो उन्हें अपने साथ लेना ही होगा।

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