दुर्ग में अतिथि-शिक्षकों को पुलिस ने दी प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी 23 दिनों से जारी-आंदोलन 2 बार मंत्री से चर्चा के बाद भी सहमति नहीं
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षकों का आंदोलन बुधवार को 23वें दिन भी जारी रहा। संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने 24 घंटे तक स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव किया। मंत्री से बैठक कराने के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी मंत्री निवास से लौटकर हिंदी भवन के सामने स्थित धरना स्थल पर वापस बैठ गए।







शिक्षकों का कहना है कि मंत्री से चर्चा के बावजूद उनकी मांगों पर अभी तक कोई ठोस या सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि सरकार और संगठन के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इधर, बुधवार सुबह दुर्ग पुलिस भारी पुलिस बल के साथ धरना स्थल पहुंची। प्रदर्शनकारी अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शाम तक धरना समाप्त करने की चेतावनी दी। शिक्षकों के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि यदि शाम तक धरना खत्म नहीं किया गया, तो अगले दिन से उन्हें धरना स्थल पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी




चेतावनी के बाद शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी
पुलिस की चेतावनी के बाद आंदोलनकारी अतिथि शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि वे पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी मांगों पर निर्णय लेने के बजाय प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने का दबाव बना रहा है।


समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग पर अड़े शिक्षक
अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे पिछले 11 सालों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सेवा सुरक्षा और वेतन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि वे समान कार्य के बदले समान वेतन, सेवा सुरक्षा, संविलियन और मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच चर्चा की संभावना बनी हुई है, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहिए।




