
किरायेदारों के लिए सुनहरा मौका,पोटिया कला, गणपति विहार व सरस्वती नगर के मोर मकान मोर आस आवासो का आबंटन जल्द,शुल्क जमा कर आवास पाए
दुर्ग|नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन की सवेदनशील योजना मोर मकान मोर आस इस योजना के अंतर्गत नगर पालिक निगम दुर्ग क्षेत्रांतर्गत वर्षो से किरायेदारों के रूप में निवासरत परिवारों को मात्र 3.50 लाख लगभग में 10.00 लाख बाजार मूल्य के लागत वाले बेहतर लोकेशन पर सर्वसुविधा युक्त, स्वच्छ वातावरण में आवास प्रदान करने हेतु इस महत्वपूर्ण योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसको लेकर आयुक्त लोकेश चन्द्राकर ने बैठक लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।उन्होंने मौजूद अधिकारियों को मोर मकान मोर आस किरायेदार क्षेणी के पोटिया कला गणपति विहार व सरस्वती नगर के आवासों को तीन माह के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए।
शेष बचे कार्यो को जल्द करवाने को कहा गया।उन्होंने कहा कि किरायदारों के लिए बेहद सुनहरा अवसर है प्रधानमंत्री आवास कार्यलय डाटा सेंटर में जाकर 100 रुपये भुगतान कर आवेदन प्राप्त कर अपना खुद का आशियाना बनाए। उन्होंने कहा आवेदक आबंटन हेतु आवास कार्यालय पहुँचकर अपना शुल्क जल्द पटाए। आवास ऋण की सुविधा हेतु डाटा सेंटर में संपर्क किया जा सकता है। इस दौरान कार्यपालन अभियंता सुशील बाबर राजेश पांडेय जितेंद्र समैया आशुतोष ताम्रकार, प्रीतेश वर्मा आदि मौजूद रहें







शनिवार और रविवार को भी प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा डाटा सेंटर ऑफिस खुलेंगे:
शासन द्वारा निर्देशित किया गया है कि मोर जमीन मोर मकान बीएलसी घटक योजना अन्तर्गत 30 अप्रेल 2023 उपरान्त कोई भी नवीन आवास की स्वीकृति नहीं दी जावेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के मोर जमीनण्मोर मकान बीएलसी घटक में अपने निकाय क्षेत्र अन्तर्गत योजना की व्यक्तिगत समीक्षा करते हुए बीएलसी के पात्र हितग्राहियों का नवीन डीपीआर तैयार कर अविलंब अधोहस्ताक्षरकर्ता कार्यालय में प्रेषित किया जाना सुनिश्चित करें।
नवीन डीपीआर तैयार करने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि योजना के दिशा निर्देशों के अनुरूप केवल पात्र हितग्राहियों वलीडटेड के डीपीआर ही अनुमोदन हेतु प्रेषित किये जाने की बात कही। आयुक्त लोकेश चन्द्राकर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शनिवार और रविवार को भी प्रधानमंत्री आवास शाखा डाटा सेंटर ऑफिस खुलेंगे एवं 23 अप्रेल 2023 रविवार शाम तक प्राप्त प्राप्त दस्तवेजों का डीपीआर बनाया जाए।











