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दुर्ग जिला अस्पताल में खून की कमी से युवती की मौत मामले में 9 कर्मचारियों को नोटिस:ब्लड के लिए भटकता रहा परिवार, इलाज में लापरवाही के कारण नोटिस जारी

By Dinesh chourasiya

 दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित युवती दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। सभी से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह की ओर से बनाई गई दो सदस्यीय जांच टीम ने करीब 7 दिन तक इस पूरे मामले की जांच की। टीम ने अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया, खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के नियमों और इलाज के दौरान अपनाई गई सभी प्रक्रियाओं को ध्यान से देखा और समझा।

रिपोर्ट में यह सामने आया है कि इलाज करने और खून (ब्लड) उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कई जगहों पर गंभीर लापरवाही हुई है। कलेक्टर ने बताया कि जांच अधिकारियों की रिपोर्ट में 9 कर्मचारियों की सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी तय की गई है।

इसी आधार पर सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है और उनसे जवाब मांगा गया है।

जानिए क्या था पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक दीपिका गाड़ा (20) भिलाई के मरोदा इलाके की रहने वाली थी। रिश्तेदारों के अनुसार वह पिछले कई दिनों से बीमार थी और उन्हें हाथ-पैर, कमर सहित पूरे शरीर में तेज दर्द की शिकायत थी।

शनिवार रात करीब 11 बजे उसकी हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि शरीर में खून की मात्रा काफी कम है और तुरंत ब्लड चढ़ाने की जरूरत है।

रिश्तेदारों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा गया। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, जिसके चलते वे तुरंत डोनर की व्यवस्था नहीं कर पाए।

इस दौरान उन्होंने अस्पताल स्टाफ और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट ब्लड उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, ताकि इलाज शुरू हो सके, लेकिन आरोप है कि उन्हें ब्लड नहीं दिया गया।

रिश्तेदारों का कहना है कि उन्होंने कई बार अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और इलाज के दौरान सोमवार को दीपिका जान चली गई।

दीपिका पिछले कई दिनों से बीमार थी। (फाइल फोटो)

केवल हीमोग्लोबिन 5 ग्राम था

दीपिका की मां ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा था कि उसकी ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर करीब 5 ग्राम पाया गया है। परिवार ने अस्पताल से रिक्वेस्ट किया था कि पहले एक यूनिट खून दे दिया जाए और बाकी की व्यवस्था बाद में कर ली जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने स्वीकार किया कि दीपिका सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। उन्होंने बताया कि उसका ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव था और हीमोग्लोबिन का स्तर काफी कम था।

उन्होंने यह भी माना कि ऐसी आपात स्थिति में, यदि मरीज के परिजन डोनर उपलब्ध नहीं करा पाते हैं, तो स्थिति को देखते हुए कम से कम एक या दो यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया जा सकता था

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