छत्तीसगढ़

श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर धनपुर में शांति एवं सद्भाव के साथ मनाई जाएगी चैत्र नवरात्रि महोत्सव

श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर पब्लिक ट्रस्ट धनपुर जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही में बासंतीय चैत्र नवरात्रि महोत्सव आगामी 22 मार्च 2023 से आयोजित किया जाएगा जो 30 मार्च तक चलेगा।

चैत्र नवरात्रि महोत्सव शांतिपूर्ण एवं धूमधाम से मनाने हेतु श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर पब्लिक ट्रस्ट धनपुर के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों की संयुक्त बैठक मरवाही एसडीएम आनंद तिवारी की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस बैठक में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अशोक वाडेगांवकर थाना प्रभारी पेंड्रा धर्म तिवारी ग्राम धनपुर की सरपंच मीरावती श्याम कार्यकारी अध्यक्ष आनंद जयसवाल कोषाध्यक्ष सुरेश पांडे , भागवत सिंह गोंड़, गोविंद सिंह, भारत सिंह श्याम पीतांबर सिंह मार्को, गणेश पांडे रामनिवास तिवारीवेद प्रकाश पाण्डेय, लक्ष्मी प्रसाद तिवारी, छाया विधायक गुलाब राज, रघुवीर श्याम, गुलाब वाकरे अमन ओट्टी अजमेर सिंह अध्यक्ष पेसा कमेटी धनपुर, पूर्व जनपद अध्यक्ष देवकी ओट्टी,नायब तहसीलदार प्रशांत गुप्ता अक्षय नामदेव सहित प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे। सभी ने शांति एवं सद्भाव तरीके से चैत्र नवरात्रि महोत्सव मनाने के लिए सहमति जताई।

चैत्र नवरात्रि महोत्सव के लिए श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर पब्लिक ट्रस्ट धनपुर द्वारा मनोकामना ज्योति कलश एवं जवारा का स्थापना किया जाएगा जिसके लिए मंदिर के पुजारी एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संपर्क कर ज्योति कलश की स्थापना कराई जा सकती है।

पहाड़ों के नीचे विराजी है माता दुर्गा
नवगठित गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के विकासखंड मुख्यालय पेंड्रा से उत्तर में सिवनी जाने के रास्ते में पेंड्रा से 14 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग में पुरातात्विक पौराणिक गांव धनपुर स्थित है। यह धनपुर गांव बिलासपुर कटनी रेल मार्ग के पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से 22 किलोमीटर दूर स्थित है जबकि विकासखंड मुख्यालय मरवाही से ग्राम धनपुर की दूरी 30 किलोमीटर है।

पुरातात्विक महत्त्व के ग्राम धनपुर में जन श्रुति के अनुसार प्राचीन काल में पांडवों ने रतनपुर में रहने के बाद 1 वर्ष का अज्ञातवास धनपुर के जंगलों में व्यतीत किया था। इस दौरान उन्होंने लगभग 350 तालाब भी बनाए जिनमें से 200 की संख्या में तालाब अभी भी अस्तित्व में है जबकि बाकी तालाब किसानों ने खेत बना लिए हैं। धनपुर मैं खुदाई के दौरान अनेक तरह की मूर्तियां एवं निर्माण के अवशेष मिलते हैं यह शिल्प अविभाजित बिलासपुर जिले में बिखरे जैन कलचुरी हैहैवंशी मूर्ति शिल्प के समकालीन है जो नवीं दसवीं शताब्दी के मालूम पड़ते हैं। धनपुर जैन धर्मावलंबियों के आश्रय का केंद्र रहा होगा यह यहां यत्र तत्र बिखरी जैन मूर्तियों के अवशेष से पता चलता है।

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