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पीएम से मिलकर कब्जा जमीन की शिकायत  महाराष्ट्र के BJP विधायक ने कब्जा छोड़ा  बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ एक ही क्लास में पढ़ाई की थी असग़र अली 

By Dinesh chourasiya

असगर अली वोहरा ने 8 सितंबर को पीएम से मुलाकात के बाद कहा था कि उम्मीद है मामला सुलझ जाएगा। - Dainik Bhaskar

महाराष्ट्र में ठाणे के मीरा रोड में रहने वाले 81 साल के असगर अली वोहरा को जमीन विवाद में राहत मिली है। पीएम मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने उनसे जुड़ी विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन परमिट सरेंडर करने की बात कही है।

वोहरा ने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात कर जमीन विवाद में दखल देने और CBI जांच की मांग की थी। दोनों की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं। वोहरा का दावा है कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ एक ही क्लास में पढ़ाई की थी।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने पीएम मोदी और असगर अली वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं।

15 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे वोहरा

वोहरा के मुताबिक, जमीन को लेकर वह करीब 15 साल से अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने मामला उठा रहे थे। उनका आरोप है कि उनकी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसे दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया।

इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस हैं। वोहरा ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। इस मामले में 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

मुलाकात के बाद अधिकारियों ने कंपनियों को बुलाया

वोहरा के मुताबिक, पीएम से मुलाकात के बाद मामले में गतिविधियां शुरू हुईं। मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के मैनेजमेंट को 16 सितंबर को अपना पक्ष रखने और मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था।

इससे पहले ही मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में बैठक बुलाई। इसमें वोहरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे।

कंपनी ने निगम से कंस्ट्रक्शन परमिट रद्द करने की मांग की

बैठक के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने मामले से पूरी तरह पीछे हटने की बात कही है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने मीरा भायंदर नगर निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग को लेटर देकर प्लॉट का कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिया।

कंपनी ने बताया कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए प्लॉट खरीदा था और 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की इजाजत हासिल की थी। लेकिन जमीन के मालिकाना हक के विवाद को देखते हुए कंपनी ने परमिट वापस करने का फैसला किया। उसने नगर निगम से कंस्ट्रक्शन परमिट रद्द करने और प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई फीस वापस करने की मांग की।

मेहता ने शिकायत वापस ली

नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को अलग लेटर भेजा। इसमें उन्होंने वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है।

2015 की इस शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण और धमकी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत वापस लेने से जुड़े लेटर संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए हैं।

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