सरकार का आदेश-₹2,000 तक UPI पेमेंट पर चार्ज नहीं लगेगा:बड़े पेमेंट पर दुकानदारों से फीस पर अभी फैसला नहीं; देश में 55 करोड़ यूजर
By Dinesh chourasiya
UPI से ₹2,000 तक पेमेंट करने पर ग्राहक से किसी तरह की फीस नहीं ली जा सकती। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर यह स्थिति साफ कर दी। अब ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकेंगे। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस छूट में शामिल किया गया है।







दरअसल, अगस्त में संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास होने के बाद UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। आशंका थी कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जा सकता है। इससे बड़े पेमेंट लेने वाले दुकानदारों और कारोबारियों की लागत बढ़ने की बात कही जा रही थी। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका थी। देश में जून 2026 तक करीब 55.5 करोड़ UPI यूजर्स थे।





10 सवाल-जवाब में वह सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है…
सवाल: क्या ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट है? जवाब: नहीं। ₹2,000 कोई नई पेमेंट लिमिट नहीं है। UPI से इससे ज्यादा रकम भेजी जा सकती है। यह सिर्फ फीस से जुड़ी सीमा है। यानी ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकते। अगर लगाना है तो सरकार को नियम बनाने होंगे।
सवाल: अगर मुझे ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करना हो तो क्या फीस लगेगी? जवाब: अभी नहीं। ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। सिर्फ ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करने पर अपने आप कोई चार्ज नहीं कटेगा। भविष्य में फीस लगानी है या नहीं, इसकी सीमा और दर सरकार के आगे के नियमों से तय होगी।
सवाल: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट को लेकर इतनी चर्चा क्यों है? जवाब: इसकी बड़ी वजह बड़े कारोबारी पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को ₹198 लाख करोड़ यूपीआई से पेमेंट हुए। इनमें ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन सिर्फ 4% हुए, लेकिन इनकी कुल वैल्यू ₹131 लाख करोड़ थी। जो कुल पेमेंट का 66% है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए किसी दुकान पर 100 UPI पेमेंट हुए। इनमें 96 पेमेंट ₹2,000 या उससे कम के हैं और सिर्फ 4 पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा के। संख्या में ये 4 पेमेंट बहुत कम हैं, लेकिन इनमें कार, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स या दूसरे महंगे सामान की खरीदारी के कारण बहुत बड़ी रकम शामिल हो सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में भी यही तस्वीर दिखी। दुकानदारों को किए गए UPI पेमेंट में ₹2,000 से ज्यादा वाले ट्रांजैक्शन करीब 4% ही थे, लेकिन कुल रकम में इनकी हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई थी। यानी आसान भाषा में कहें तो हर 100 में सिर्फ 4 बड़े पेमेंट, लेकिन UPI से दुकानदारों को मिलने वाले हर ₹100 में करीब ₹67 इन्हीं पेमेंट से आए।
इसीलिए इन पेमेंट पर संभावित शुल्क को लेकर चर्चा है। अगर भविष्य में MDR लगाया जाता है, तो संख्या में कम होने के बावजूद बड़े अमाउंट के पेमेंट पर दुकानदारों की लागत बढ़ सकती है।
सवाल: अगर मैं दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को ₹5,000 या ₹10,000 भेजूं तो क्या फीस लगेगी? जवाब: नहीं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले P2P (Person-to-Person) पेमेंट मुफ्त रहेंगे। इसलिए दोस्त, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को बड़ी रकम UPI से भेजने पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
सवाल: फिर संभावित फीस किन पेमेंट पर लग सकती है? जवाब: मुख्य चर्चा मर्चेंट पेमेंट को लेकर है। यानी जब आप किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को UPI से पेमेंट करते हैं। अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो तय सीमा से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट इसके दायरे में आ सकते हैं।
सवाल: MDR क्या होता है और यह किससे लिया जाता है? जवाब: MDR यानी Merchant Discount Rate। आसान भाषा में यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले दुकानदार या कारोबारी से लिया जाने वाला शुल्क है। कार्ड पेमेंट में इस तरह का शुल्क पहले से मौजूद है। अगर UPI पर MDR लागू होता है, तो यह मुख्य रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क होगा।
सवाल: क्या ₹2,000 से ज्यादा के हर मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगेगा? जवाब: जरूरी नहीं। सरकार के मुताबिक, अगर MDR लागू किया जाता है तो यह तय सीमा से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर ही लगाया जाएगा। साथ ही ज्यादातर छोटे और सामान्य मर्चेंट पेमेंट को मुफ्त रखने की बात कही गई है। यानी ₹2,001 का हर पेमेंट अपने आप MDR के दायरे में आएगा, ऐसा अभी तय नहीं है।
सवाल: अगर MDR लागू हुआ तो इसकी दर कितनी होगी? जवाब: अभी इसकी अंतिम दर तय नहीं हुई है। सरकार ने कहा है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसकी दर बहुत मामूली होगी और डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR के मुकाबले काफी कम होगी।
सवाल: MDR का असर ग्राहक पर पड़ेगा या दुकानदार पर? जवाब: अभी इस बारे में अंतिम व्यवस्था तय नहीं है। MDR मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है, इसलिए इसका सीधा असर दुकानदार या कारोबारी की पेमेंट लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, अगर कारोबारी की लागत बढ़ती है तो वह इसे अपनी कारोबारी लागत में शामिल कर सकता है। इसका असर सामान या सेवा की कीमत पर पड़ेगा या नहीं, यह आगे के नियमों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सवाल: सरकार कानून में बदलाव क्यों करने जा रही है? जवाब: सरकार का कहना है कि UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसे सुरक्षित रखने, साइबर फ्रॉड रोकने, तकनीक अपग्रेड करने और पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में लगातार खर्च होता है। कानून में बदलाव को इसी लंबे समय की जरूरत से जोड़ा गया है। आम यूजर के रोजमर्रा के छोटे पेमेंट पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं है। आगे बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होता है या नहीं, इसकी सीमा और दर सरकार के अगले नियमों से स्पष्ट होगी।
राहुल बोले- सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस का रास्ता खोला, BJP का जवाब- झूठा आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। सरकार कहती है कि कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से। ग्राहक की जेब से आएगी। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस का दावा झूठा है।
UPI कैसे काम करता है?
UPI सर्विस के लिए आपको एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस तैयार करना होता है। इसके बाद इसे बैंक अकाउंट से लिंक करना होगा। इसके बाद आपका बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड आदि याद रखने की जरूरत नहीं होती। पेमेंट करने वाला बस आपके मोबाइल नंबर के हिसाब से पेमेंट रिक्वेस्ट प्रोसेस करता है।
अगर, आपके पास उसका UPI आईडी (ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर या आधार नंबर) है तो आप अपने स्मार्टफोन के जरिए आसानी से पैसा भेज सकते हैं।
न सिर्फ पैसा बल्कि यूटिलिटी बिल पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग, खरीदारी आदि के लिए नेट बैंकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड भी जरूरत नहीं होगी। ये सभी काम आप यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस सिस्टम से कर सकते हैं।
भारत में UPI का नेटवर्क कितना बड़ा?
जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI से जुड़े थे। सिर्फ जुलाई में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम करीब ₹29.88 लाख करोड़ रही। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। यानी छोटे दुकानों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े पेमेंट तक, UPI रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट का सबसे अहम जरिया बन चुका है।
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