भूपेश के पूर्व PA और OSD के घर ED रेड:दुर्ग में पूर्व पटवारी के घर भी पहुंची टीम, CGPSC घोटाले में 7 जगहों पर एक्शन
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ में CGPSC घोटाले के मामले में ED ने 7 जगहों पर रेड की है। दुर्ग में दो ठिकानों पर जांच चल रही है। इनमें पूर्व CM भूपेश बघेल के PA रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व OSD चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के घर शामिल हैं।







भिलाई में केके चंद्रवंशी के घर ED की टीम सुबह करीब 6 बजे 2-3 गाड़ियों से पहुंची। टीम दस्तावे
जों और दूसरे जरूरी सामान की जांच कर रही है। घर के बाहर पुलिस बल भी तैनात है।
वहीं, दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी स्थित कमलेश राजपूत के घर पर भी सुबह से जांच जारी है। पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारी रह चुके राजपूत के घर ED के करीब 8 अधिकारी दो गाड़ियों से पहुंचे हैं।




जांच में राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी पदों पर नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार हैं। फिलहाल ED की ओर से कार्रवाई को लेकर डिटेल जानकारी सामने नहीं आई है।
इसके साथ ही बलरामपुर जिले में भूपेश बघेल के OSD रहे चेतन बोरघारिया के घर भी छापा पड़ा है। वर्तमान में बोरघारिया बलरामपुर के अपर कलेक्टर हैं। सर्किट हाउस में उनसे पूछताछ जारी है।
इसी CGPSC घोटाले से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को जमानत दी है।
सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद एक्शन
यह कार्रवाई पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की 25 जुलाई को गिरफ्तारी के बाद हो रही है। सोनवानी को परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े केस में गिरफ्तार किया गया था।
जांच 2020 और 2021 में CGPSC की राज्य सेवा परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है। ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच 2024 में CBI की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
ED का आरोप है कि सोनवानी ने अवैध तरीके से प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद की। इसके बदले रिश्वत ली गई और इसका फायदा उनके रिश्तेदारों और पैसे देने वाले उम्मीदवारों को मिला।
डिप्टी कलेक्टर-DSP पदों पर चयन कराने लेनदेन का आरोप
CBI ने 2 साल पहले भी CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था।
CBI का आरोप है कि CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए अवैध लेन-देन हुआ।
VIP लोगों के रिश्तेदारों का चयन करने का आरोप
CBI के मुताबिक, सोनवानी के कार्यकाल में PSC में हुई भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। आरोप है कि, उन्होंने अपने कई करीबी रिश्तेदारों और कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई है। जांच में पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
CBI की जांच में क्या सामने आया ?
CBI के मुताबिक, टामन ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की और दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए।
जानिए क्या है CGPSC घोटाला
यह मामला CGPSC 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।
171 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा
CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी। …………………




