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दुर्ग जिला अस्पताल में एक यूनिट खून नहीं मिलने से दीपिका की मौत मामले में बड़ा एक्शन, 25 दिन बाद 4 संविदा कर्मी बर्खास्त, 2 डॉक्टर समेत 7 पर कार्यवाही

By Dinesh chourasiya

सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित दीपिका गाड़ा की मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी सिर्फ 30 से 40 कदम थी। इसके बावजूद ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों ने खुद ब्लड बैंक जाकर मरीज के लिए खून उपलब्ध कराने की कोई कोशिश नहीं की।

जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए लिखा कि कर्मचारियों ने इस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी आधार पर दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्स समेत चार संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। हालांकि इसी रिपोर्ट के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जब ब्लड बैंक इतनी कम दूरी पर था, तब वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई। इस पूरे मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े जिम्मेदार अफसरों को बचाया जा रहा है।

खून नहीं मिलने से इलाज के दौरान दीपिका की हुई थी जिला अस्पताल में मौत।

दुर्ग के जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 साल की युवती दीपिका गाड़ा की खून नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में आखिरकार 25 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। जांच के बाद 2 डॉक्टर समेत कुल 7 कर्मचारियों को जिम्मेदार माना गया है। इनमें 4 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं, जबकि 3 नियमित और संविदा कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जिस समय ब्लड बैंक में 85 यूनिट खून मौजूद था, तब गंभीर मरीज को एक यूनिट खून भी नहीं मिल सका। इसके बावजूद ब्लड बैंक और अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई।

4 संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त दुर्ग जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार रेडक्रॉस सोसायटी से नियुक्त लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां और निगार परवीन की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा एनएचएम की स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर को भी सेवा समाप्त कर दी गई है। वहीं नियमित स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम की विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है।

जानिए जांच रिपोर्ट में किसने क्या लापरवाही बरती…

जागेश्वरी देवी : दीपिका गाड़ा के पिता रात के दो बजे फीमेल वार्ड में आए लेकिन यहां पर ड्यूटी पर तैनात जागेश्वरी देवी अनुपस्थित थी। रात में ही स्पष्ट हो गया था कि दीपिका का हिमोग्लोबिन का स्तर 5.5 ग्राम है। सुबह 4-5 बजे नर्सिंग ऑफिसर जागेश्वरी देवी को ब्लड रिपोर्ट मिल गया था। लेकिन इसके बाद भी जागेश्वरी देवी ने सुबह 8 बजे तक आपतकालिन ड्यूटी डॉक्टर को इसकी जानकारी नहीं दी। जांच प्रतिवेदन के अनुसार फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी 30-40 कदम की है, तनुजा वर्मा स्वंय भी ब्लड बैंक में जाकर मरीज के लिए ब्लड उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा कर सकती थी, लेकिन उन्होंने कोई रूचि नहीं ली।

निगार परवीन : मरीज दीपिका गाड़ा के पिता 31 मई को ब्लड रिक्यूजिशन फॉर्म लेकर गए लेकिन निगार परवीन ने मरीज के परिजन से डोनर की मांग की। जबकि पर्ची में सिकल सेल क्राइसेस और हिमोग्लोबिन 5.5 लिखा हुआ था। पिता ने स्वंय का खून देने की बात कही लेकिन निगार ने मरीज के पिता को लौटा दिया। मरीज का हिमोग्लोबिन 5.5 ग्राम था, परंतु मरिज के परिजन ब्लड अरेंज नहीं कर पा रहे थे, इसके बाद भी निगार परवीन ने इंचार्ज को कोई सूचना नहीं दी। वहीं फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी 30-40 कदम की है, तनुजा वर्मा स्वंय भी ब्लड बैंक में जाकर मरीज के लिए ब्लड उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा कर सकती थी, लेकिन उन्होंने कोई रूचि नहीं ली।

तनुजा वर्मा : ड्यूटी पर आने के बाद तनुजा वर्मा को बताया गया था कि मरीज दीपिका गाड़ा को ब्लड चढ़ाना है। मरीज का हिमोग्लोबिन 5.5 ग्राम था, परंतु मरिज के परिजन ब्लड अरेंज नहीं कर पा रहे थे। ऐसी स्थिति में नर्सिंग ऑफिसर तनुजा वर्मा मैट्रन या अन्य किसी भी वरिष्ठ चिकित्सक से समन्वय स्थापित कर या अन्य ड्यूटी डॉक्टर को स्थिति से अवगत करवा कर ब्लड की व्यवस्था करने के लिए सार्थक पहल नहीं की गई। फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी 30-40 कदम की है, तनुजा वर्मा स्वंय भी ब्लड बैंक में जाकर मरीज के लिए ब्लड उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा कर सकती थी, लेकिन उन्होंने कोई रूचि नहीं ली।

तरन्नुम जहां : मरीज दीपिका गाड़ा के 31 मई को ब्लड रिक्यूजिशन फॉर्म में सिकल सेल क्राइसेस स्पष्ट रूप से अंकित था। मरीज के पिता जब ब्लड लेने लैब टेक्नीशियन निगार परवीन के पास पहुंचे तो उनसे डोनर की मांग की गई। उस वक्त तरन्नुम जहां भी पास में मौजूद थीं। तरन्नुम के सामने ही यह पूरी घटनाक्रम घटित हुई। मरीज के परिजन को ब्लड उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी दोनों की बराबर दी थी। फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी 30-40 कदम की है, तनुजा वर्मा स्वंय भी ब्लड बैंक में जाकर मरीज के लिए ब्लड उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा कर सकती थी, लेकिन उन्होंने कोई रूचि नहीं ली।

मौत के परिजन अस्पताल परिसर में रोते रहे

जानिए क्या था पूरा मामला दीपिका गाड़ा (20) भिलाई के मरोदा इलाके की रहने वाली थी। वह सिकल सेल एनीमिया की मरीज थी और कई दिनों से बीमार चल रही थी। परिजनों के मुताबिक उसके हाथ-पैर, कमर और पूरे शरीर में तेज दर्द था। 30 मई शनिवार रात करीब 11 बजे उसकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि शरीर में खून की मात्रा बहुत कम है और तुरंत ब्लड चढ़ाने की जरूरत है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और वे तुरंत डोनर नहीं ला सके। उन्होंने अस्पताल और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट खून देने की गुहार लगाई ताकि इलाज शुरू हो सके, लेकिन उन्हें खून नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इलाज के दौरान सोमवार 1 जून को दीपिका की मौत हो गई।

सिर्फ 5.5 ग्राम था हीमोग्लोबिन दीपिका की मां के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया था कि उसकी ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन करीब 5.5 ग्राम था। परिवार ने अस्पताल से अनुरोध किया था कि पहले एक यूनिट खून दे दिया जाए और बाकी की व्यवस्था बाद में कर ली जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने भी माना था कि दीपिका सिकल सेल एनीमिया की मरीज थी और उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था। उन्होंने कहा था कि ऐसी आपात स्थिति में यदि मरीज के परिजन तुरंत डोनर उपलब्ध नहीं करा पाते हैं, तो हालात को देखते हुए एक या दो यूनिट ब्लड दिया जा सकता था

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