
हरेली पर बालोद में दिखा परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम
ड्रोन दीदियों ने आधुनिक कृषि यंत्र ड्रोन की पूजा कर चढ़ाया गुड़-चीला और नारियल, किसानों को तकनीक से जोड़ने का लिया संकल्प
रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद, 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर बालोद जिले में लोक-संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। सावन अमावस्या के अवसर पर जहां किसानों ने अपने पारंपरिक कृषि औजार हल, नांगर, कुदाली एवं फावड़े की पूजा कर अच्छी फसल और समृद्धि की कामना की, वहीं जिले की ड्रोन दीदियों ने आधुनिक कृषि यंत्र ड्रोन की विधिवत पूजा-अर्चना कर गुड़-चीला एवं नारियल का भोग अर्पित किया।
शासन की ड्रोन दीदी योजना के तहत प्रशिक्षित जिले की तीन ड्रोन दीदियों भुनेश्वरी साहू, चित्ररेखा साहू एवं रूचि साहू ने हरेली की पारंपरिक भावना को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ते हुए किसानों के बीच एक नया संदेश दिया।
ड्रोन दीदी भुनेश्वरी साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति कृषि और कृषि उपकरणों के सम्मान की परंपरा से जुड़ी हुई है। वर्तमान समय में ड्रोन भी किसानों के लिए एक आधुनिक कृषि यंत्र और उपयोगी साथी बन चुका है। इसके माध्यम से फसलों में नैनो उर्वरक एवं कृषि दवाइयों का छिड़काव कम समय में किया जा सकता है।
वहीं चित्ररेखा साहू ने बताया कि ड्रोन तकनीक से खेती के कार्यों में काफी सुविधा मिली है। उन्होंने हरेली के अवसर पर जिले के अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने का संकल्प लिया। रूचि साहू ने कहा कि उनका सपना है कि बालोद जिले के अधिक से अधिक खेतों तक ड्रोन तकनीक पहुंचे, जिससे किसानों की लागत कम हो और कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक एवं प्रभावी बन सके।
ड्रोन दीदियों ने इस पहल को महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक से जुड़ने से महिलाओं को नई तकनीकी दक्षता हासिल करने के साथ रोजगार एवं आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।
हरेली के अवसर पर ड्रोन की पूजा का यह दृश्य बालोद में छत्तीसगढ़ी कृषि परंपरा और आधुनिक तकनीक के मेल का प्रतीक बना। इस पहल के माध्यम से जहां लोक संस्कृति और परंपराओं को सम्मान मिला, वहीं किसानों को बदलते समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का संदेश भी मिला।








