
गुणवत्तायुक्त शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की कुंजी: कलेक्टर मिश्रा, खराब परीक्षा परिणाम पर होगी कार्रवाई
गुरूर के प्राचार्यों-शिक्षकों की बैठक में शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा, 80 प्रतिशत से कम उपस्थिति पर कार्रवाई की चेतावनी
रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद, 11 अगस्त 2026। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में गुरूर विकासखण्ड के हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों की बैठक लेकर शिक्षा विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने प्राचार्यों को उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम के लिए स्कूलवार कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी अध्ययन-अध्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विगत दो वर्षों के कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों की तुलना करते हुए शिक्षा सत्र 2025-26 के परिणामों की समीक्षा की। साथ ही कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार तथा मेधावी विद्यार्थियों को प्रावीण्य सूची में स्थान दिलाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली।
खराब परिणाम पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
बैठक में जिन विषयों के परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, उन विषयों के शिक्षकों से कलेक्टर ने परिणाम खराब होने का कारण पूछा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा परिणाम में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर संबंधित प्राचार्यों एवं शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित प्राचार्यों एवं शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
80 प्रतिशत से कम उपस्थिति पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर ने जून एवं जुलाई माह में स्कूलवार विद्यार्थियों की उपस्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति 80 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। कम उपस्थिति वाले स्कूलों में आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उन्होंने पालकों के साथ नियमित बैठक आयोजित कर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा पालकों से निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।
शिक्षकों की उपस्थिति और रिक्त पदों पर भी समीक्षा
कलेक्टर ने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति एवं अध्यापन कार्य की समीक्षा करते हुए समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राचार्यों को किसी भी शिक्षक-शिक्षिका का 15 दिन से अधिक का संतान पालन अवकाश स्वयं स्वीकृत नहीं करने तथा ऐसे आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
बैठक में शिक्षकों के रिक्त पदों की भी जानकारी ली गई। विषय शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संगवारी गुरुजी की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए। डीएमएफ प्रभावित क्षेत्रों के विद्यालयों में डीएमएफ के माध्यम से तथा अन्य क्षेत्रों में शाला विकास समिति के माध्यम से मानसेवी शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने मेधावी विद्यार्थियों की पहचान कर उनके परीक्षा परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा। गंभीर बीमारियों से पीड़ित विद्यार्थियों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा दिलाने के लिए ऐसे बच्चों को चिन्हित कर समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता एवं आवश्यक प्रयास करने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को नशामुक्त रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री दीपक दुबे, डीएमसी श्री अवन कुमार जांगड़े, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी सहित गुरूर विकासखण्ड के हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्य एवं शिक्षक उपस्थित रहे।









