CG के बलौदाबाजार हिंसा मामला …120 साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड जलकर खाक : पूर्व मंत्री रुद्र गुरु बोले- माफी मांगे मंत्री; साय सरकार ने कहा था- साजिश में कांग्रेस के पूर्व मंत्री-विधायक शामिल
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार हिंसा में सरकार के आरोप के बाद पूर्व मंत्री गुरु रूद्र कुमार ने कहा कि, तीन-तीन मंत्रियों ने मुझ पर षड्यंत्र करने का आरोप लगाया है, इसलिए मैं खुद गिरफ्तारी देने आया हूं। उन्होंने कहा कि, मंत्री माफी मांगे, नहीं तो मानहानि का केस करूंगा। रुद्र गुरु बुधवार को गिरफ्तारी देने के लिए रायपुर एसएसपी दफ्तर पहुंचे थे।
गुरु रुद्र कुमार ने कहा कि, इतनी बड़ी घटना सतनामी समाज नहीं कर सकता है। सतनामी समाज को बदनाम करने के लिए भाजपा की साजिश होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि, आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन घटना समाज को तोड़ने की साजिश थी। हम खुद सच्चाई जानना चाहते हैं।







सतनामी समुदाय के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में करोड़ों की संपत्ति जलकर खाक हो गई। इस दौरान अंग्रेजों के जमाने का 120 साल का रिकॉर्ड भी जल गया। हिंसा के पीछे सरकार ने कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताया और आरोप लगाया था कि कांग्रेस के विधायकों, पूर्व मंत्रियों और नेताओं ने लोगों को भड़काने का काम किया। साथ ही हिंसा करने वालों से नुकसान की वसूली की बात कही थी।

मामले में एक्शन लेते हुए राज्य सरकार ने जिले के कलेक्टर और SP को हटा दिया गया है। मंगलवार देर रात आदेश जारी किया गया। आईएएस अधिकारी दीपक सोनी को बलौदाबाजार जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। विजय अग्रवाल नए एसपी होंगे। हटाए गए कलेक्टर केएल चौहान को मंत्रालय में विशेष सचिव और एसपी सदानंद कुमार को रायपुर पुलिस मुख्यालय में भेज दिया गया है।
इस मामले में 7 अलग-अलग FIR दर्ज की गई है। अब तक 73 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि 200 हिरासत में हैं। उपद्रवियों की तलाश के लिए पुलिस की 12 टीमें और जांच के लिए 22 पुलिस अफसरों की टीम बनाई गई है।




दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार का फेलियर बताते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। 14 जून को कांग्रेस नेता घटना स्थल पर जाएंगे। घटना के विरोध में चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 13 जून को बलौदाबाजार बंद बुलाया है।

पहले जानिए क्यों भड़की हिंसा…
जानकारी के मुताबिक, 15 मई की देर रात सतनामी समुदाय के धार्मिक स्थल गिरौदपुरी धाम से करीब 5 किमी मानाकोनी बस्ती स्थित बाघिन गुफा में लगे धार्मिक चिन्ह जैतखाम को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। जैतखाम तोड़े जाने के विरोध में समाज के हजारों लोग कलेक्ट्रेट के पास मौजूद दशहरा मैदान में कई दिन से प्रदर्शन कर रहे थे।
पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लोगों का आरोप है कि पकड़े गए लोग असली आरोपी नहीं हैं और पुलिस दोषियों को बचा रही है। सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लोग इसी बात को लेकर उग्र हो गए। इसके बाद हालात बिगड़ते चले गए।
उपद्रवियों ने 2 दमकलों सहित 77 वाहन फूंके
उपद्रवियों ने 75 बाइक, 20 कार और 2 दमकल वाहन को आग के हवाले कर दिया। लोगों ने कलेक्ट्रेट में खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इसके बाद कुछ लोगों ने कलेक्ट्रेट में आगजनी की। इससे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर खाक हो गए। कलेक्टर कार्यालय के सामने स्थित ध्वजारोहण के पोल पर सफेद रंग का ध्वज लगा दिया था।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। इसमें पुलिसकर्मियों सहित कुछ लोग भी घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद डिप्टी CM विजय शर्मा सोमवार देर रात घटनास्थल पहुंचकर मौके का जायजा लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपद्रवियों की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए।
अंग्रेजों के जमाने का 120 साल पुराना रिकार्ड खत्म
बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट में अंग्रेजों के जमाने का 100 से 120 साल पुराना राजस्व का रिकार्ड भी उपद्रव की आग में जलकर खाक हो गया। करीब सौ साल तक बलाैदाबाजार जिले के अंतर्गत आने वाले इलाकों का पूरा रिकार्ड और अन्य फाइलें रायपुर कलेक्ट्रेट में सुरक्षित थीं।
2011-12 में बलौदाबाजार को अलग जिले का दर्जा मिला। उसी के बाद 10 ट्रकों में यहां से पूरा रिकार्ड एक-एक कर बलौदाबाजार भेजा गया था। अब तक की जांच के अनुसार सोमवार को बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट में लगाई गई आग में एक भी रिकार्ड सुरक्षित नहीं बचा है।
पुराना रिकार्ड जल जाने से अब राजस्व संबंधित मामलों की जांच में दिक्कत आएगी, क्योंकि अब रायपुर में भी उसका रिकार्ड नहीं है। बलौदाबाजार जिले के राजस्व का 1929 का बंदोबस्त मिशन (नक्शा), 1939-40 तक चकबंदी मिशन (नक्शा) की एक-एक फाइल यहां से भेज दी गयी है। इसके जल जाने से अब वहां जाति प्रमाण पत्र के प्रकरण उलझ जाएंगे।
इसी तरह रजिस्ट्री, राजस्व, फूड, आबकारी, खनिज से संबंधित सारे दस्तावेजों को भी वहीं भेज दिया गया था। इनकी दूसरी कॉपी नहीं है। ऐसे में राजस्व संबंधित प्रकरणों को निपटाने काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा बी-1 में यदि जमीन के मालिक का नाम नहीं चढ़ा होने पर परेशानी होगी। बिना रिकार्ड नाम चढ़ाना संभव ही नहीं है। ऐसे में जमीन के मालिक होने के बाद भी नाम चढ़ाने के लिए भटकना पड़ेगा।







