छत्तीसगढ़ में घरेलू सिलेंडर ₹29 महंगा:अब ₹1013 में मिलेगा; 3 महीने में ₹89 की बढ़ोतरी, हफ्तेभर पहले कॉमर्शियल गैस के दाम बढ़े थे
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर करीब 1013 रुपए हो गई है। रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई। रायपुर में पहले 14.2 किलोग्राम का घरेलू गैस सिलेंडर 984 रुपए में मिल रहा था, जो अब 1013 रुपए का हो गया है। नई दरें आज (रविवार) से लागू कर दी गई हैं।







पिछले 3 महीनों में यह दूसरी बार है, जब घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है।




वहीं, करीब एक सप्ताह पहले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी लगभग 53 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा लागत बढ़ने और घरेलू बिक्री पर हो रहे नुकसान के कारण एलपीजी की कीमतों में वृद्धि करनी पड़ी है।
कंपनियों को अब भी नुकसान का दावा
न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब ₹703 का नुकसान हो रहा था। दाम बढ़ने से बावजूद सिर्फ आंशिक भरपाई होगी।
2026 से पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में ₹50 का इजाफा किया था। 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम ₹31 तक बढ़ाए गए थे। 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में भी ₹11 का इजाफा किया गया था, जिससे इसकी कीमत ₹821.50 हो गई।
LPG से पहले पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े
पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के महंगे होने का कुछ बोझ सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।
कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत देखी जाती है।
- डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत का असर पड़ता है।
- गैस आयात, ढुलाई, बॉटलिंग प्लांट और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च जोड़ा जाता है।
- तेल कंपनियां लागत और बाजार की स्थिति देखकर कीमत तय करती हैं।
- सरकार की टैक्स और सब्सिडी संबंधी नीतियों का भी असर पड़ता है






