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CG झीरम घाटी केस में 13 साल बाद फैसला 10 आरोपी दोषी करार:1 की हो चुकी है मौत इस कांड में  30 लोगों की जान गई थी

By Dinesh chourasiya

झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में आज यानी 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस केस में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 10 आरोपियों पर आज फैसला आया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए थे।

दरअसल, 10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने सबूतों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी थी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी थी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मामले की जांच सही तरीके से नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया था कि NIA ने दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की और कोर्ट के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान नहीं लिया गया।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

जांच में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया- भूपेश बघेल

पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कांकेर में इस मामले पर कहा था कि, झीरम घाटी हत्याकांड के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जब जांच ही सही तरीके से नहीं हुई है, तो अदालत का फैसला भी केवल उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

बघेल ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मध्य क्षेत्र की बैठक में झीरम घाटी मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यदि केंद्र सरकार जांच करने में असमर्थ है, तो यह जिम्मेदारी राज्य सरकार को दी जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

भूपेश बघेल ने आगे कहा कि जब राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, तो एनआईए ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया। हालांकि, तब तक उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका था।

अब जानिए झीरम घाटी हमले के बारे में ?

दरअसल, 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई।

रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे।

कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप एक काफिले में थी

साथ ही उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा।

यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।

महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां

शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं।

चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी

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