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भिलाई के सूर्यामॉल में स्थित PVR में खाद्य विभाग की जांच:समोसा-मायोनिस और इमली चटनी के लिए सैंपल; डिस्प्ले में कॉकरोच-चींटियां मिली

By Dinesh chourasiya

भिलाई के पीवीआर सिनेमा में खाद्य विभाग की टीम अचानक जांच करने पहुंची। यहां तैयार खाने की चीजों को लेकर शिकायत मिली थी कि, सिनेमा के डिस्प्ले में रखे खाने में कॉकरोच और चींटियां घूम रही हैं। शिकायत के बाद खाद्य विभाग के अधिकारी जितेंद्र ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की।

जांच के दौरान अधिकारी ने खुद डिस्प्ले में रखे तैयार खाने को देखा। उन्होंने बताया कि, वहां कॉकरोच और चींटियां दिखाई दीं। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया कि डिस्प्ले में रखा खाना बेचने के लिए नहीं होता। पीवीआर की नीति के अनुसार इसे केवल दिखाने के लिए रखा जाता है और करीब तीन दिन बाद नष्ट कर दिया जाता है।

रसोई की भी जांच, सफाई ठीक मिली

डिस्प्ले के बाद खाद्य विभाग की टीम ने सिनेमा की रसोई की भी जांच की। अधिकारी के मुताबिक रसोई में सामान्य तौर पर साफ-सफाई ठीक मिली। जांच के दौरान एक छोटा कॉकरोच भी दिखाई दिया, लेकिन अधिकारी ने इसे बड़ी खामी नहीं माना। सबसे अहम खामी खाने की चीजों को बेचने की अनुमति से जुड़ी मिली।

पीवीआर के पास खाद्य कारोबार का लाइसेंस तो है, लेकिन उसमें तैयार खाना बनाने और बेचने वाली श्रेणी शामिल नहीं है। खाद्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि यहां सैंडविच और दूसरी तैयार खाने की चीजें बनाकर बेची जाती हैं, लेकिन इसके लिए लाइसेंस में जरूरी श्रेणी नहीं जोड़ी गई है। इसी वजह से विभाग ने तैयार खाना बेचने पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है।

लाइसेंस में श्रेणी नहीं जुड़ने तक तैयार खाना नहीं बेच सकेंगे

खाद्य विभाग ने पीवीआर प्रबंधन को नोटिस देने की बात कही है। विभाग के अनुसार पीवीआर को अपने लाइसेंस में तैयार खाने की श्रेणी जुड़वानी होगी। जब तक यह बदलाव नहीं होता, तब तक तैयार खाना बनाकर बेचने की अनुमति नहीं होगी।

अधिकारी ने साफ किया कि पॉपकॉर्न के मामले में ऐसा नहीं है कि पीवीआर के पास कोई लाइसेंस ही नहीं है। समस्या यह है कि लाइसेंस में उन सभी तरह के खाद्य पदार्थों की सही श्रेणी दर्ज नहीं है, जिन्हें वहां तैयार करके बेचा जा रहा है।

समोसा, मायनिस और इमली चटनी के सैंपल लिए

जांच के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने खाने की चीजों के नमूने भी लिए। इनमें समोसा, मायोनिस और इमली की चटनी शामिल हैं। इन नमूनों को जांच के लिए राज्य की प्रयोगशाला भेजा जाएगा। अगर किसी नमूने की जांच राज्य की प्रयोगशाला में संभव नहीं हुई तो उसे दूसरी प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। इसके लिए आगे का फैसला रायपुर स्तर से किया जाएगा।

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