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छत्तीसगढ़ में घायलों का 7 दिन तक होगा फ्री इलाज:मंत्री श्यामबिहारी बोले-डेढ़ लाख तक खर्च उठाएगी सरकार, हादसे में जनवरी-मई 2025 तक 3000 मौतें

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में घायलों को बड़ी राहत मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने शुक्रवार को घोषणा की है कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का 7 दिनों तक आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों में फ्री इलाज होगा। प्रदेश में 807 से अधिक आयुष्मान से जुड़े अस्पताल हैं।

मंत्री बिहारी ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को हादसे में चोट लगती है, तो उसे 1 लाख 50 तक का इलाज मिलेगा। अगर एक ही परिवार के 2 सदस्य घायल होते हैं तो उन्हें 3 लाख और 3 सदस्य घायल होते हैं तो 4 लाख 50 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। नकदी रहित उपचार स्कीम आज यानी 23 मई 2025 से लागू होगी।

वहीं छत्तीसगढ़ में हादसों की बात करें जनवरी से मई 2025 तक 6 हजार 390 सड़क हादसे हुए, जिनमें 2 हजार 969 लोगों की मौत हुई है, जबकि 5 हजार 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं रायपुर जिले में 650 सड़क हादसे हुए हैं, जिसमें 221 लोगों की मौत हुई है, जबकि 436 लोग घायल हुए हैं।

आयुष्मान योजना के पैनल अस्पतालों में ही मिलेगा लाभ

इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मिलेगा, जो आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत हैं। हादसे के बाद घायलों को नजदीकी पैनल अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा, जहां उन्हें पूरी तरह मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी।

अस्पताल में संसाधन नहीं तो तुरंत किया जाएगा रेफर

अगर किसी घायल को जिस अस्पताल में ले जाया गया है। वहां विशेषज्ञ या जरूरी संसाधन मौजूद नहीं हैं, तो अस्पताल उसे तुरंत किसी सक्षम अस्पताल में रेफर करेगा। इसके बाद पोर्टल पर मरीज की जानकारी अपडेट करनी होगी, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके।

ट्रॉमा और पॉली-ट्रॉमा सेंटर भी जोड़े जाएंगे

सरकार इस योजना में ट्रॉमा और पॉली-ट्रॉमा उपचार क्षमता वाले और अधिक अस्पतालों को शामिल करने की कोशिश कर रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके।

योजना के लिए एजेंसी क्या काम करेगी ?

  • योजना के तहत अस्पतालों को शामिल करना।
  • घायलों को इलाज, उसके भुगतान के लिए पोर्टल्स को देखना।
  • राज्य की तरफ से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण यानी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी से समन्वय बनाना।
  • किसी तरह की धोखेबाजी या भ्रष्टाचार के मामलों को देखना और एनएचए से समन्वय बनाना।
  • इसके तहत जो भी शिकायतें आएंगी, उसके निवारण के लिए एक सिस्टम तैयार करना।
  • अस्पतालों को समय पर भुगतान हो रहा है या नहीं, ये देखना।

मॉनिटरिंग के लिए कमेटी

योजना की मॉनिटरिंग के लिए एक बड़ी कमेटी भी बनेगी। इसमें सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ, केंद्र सरकार के अपर सचिव, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव, वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव, बीमा परिषद के महासचिव से लोग शामिल होंगे।

ये साल में दो बार बैठक करेंगे और अपने सुझाव देंगे। क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी राज्य सड़क सुरक्षा परिषद को बनाया जा सकता है, लेकिन यह राज्यों पर निर्भर है कि वह किसे इसके लिए नोडल एजेंसी बनाती है।

रायपुर में लगातार बढ़ रहा हादसों का ग्राफ

रायपुर जिले में लगातार हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है। आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी 2025 से लेकर अप्रैल 2025 तक जिले में जनवरी से लेकर अब तक 650 सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों में 221 लोगों की मौत हुई है। वहीं 436 लोग घायल हुए हैं।

वहीं बिलासपुर (244 हादसे, 49 मौत) और दुर्ग (239 हादसे, 76 मौत) का नंबर आता है। कोरबा, बलौदा बाजार, महासमुंद और जशपुर जैसे जिलों में भी हादसों की संख्या और मौतों की दर काफी अधिक रही। दूसरी ओर, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम हादसे और मौतें दर्ज की गईं।

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