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भिलाई में नवविवाहिता की मौत मामले में पति, सास, ससुर, देवर और ननद समेत पांच को 10 साल की सजा दुर्ग की सत्र अदालत ने दहेज मौत मामले में फैसला सुनाया

By Dinesh chourasiya

दुर्ग की सत्र अदालत ने दहेज मौत मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने भिलाई की 24 साल की कंचन राव की मौत के मामले में पति, सास, ससुर, देवर और ननद को दोषी ठहराते हुए सभी को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

मामला बुलेट और कंचन के पिता की जमीन में हिस्सेदारी की मांग से जुड़ा था। अदालत ने माना कि दहेज की लगातार मांग और प्रताड़ना के कारण ही कंचन ने आत्महत्या की।

कोर्ट बोली- पूरा परिवार जिम्मेदार

करीब दो साल चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने 90 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि शादी के सात साल के भीतर हुई मौत और उससे पहले दहेज के लिए लगातार प्रताड़ना के पर्याप्त सबूत मिले हैं। इसलिए इसे सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज मृत्यु माना जाएगा।

शादी के कुछ दिन बाद शुरू हुई दहेज की मांग

अभियोजन के अनुसार, कंचन राव की शादी 16 फरवरी 2022 को अमित राव से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही पति अमित राव, ससुर महेश राव, सास तारा राव, देवर अश्विन उर्फ लक्की और ननद नम्रता राव ने बुलेट बाइक की मांग शुरू कर दी थी।

2 लाख देने के बाद भी नहीं रुकी प्रताड़ना

मायके पक्ष ने बताया कि दहेज की मांग पूरी करने के लिए 2 लाख रुपए भी दिए गए थे। इसके बाद भी प्रताड़ना जारी रही। बाद में आरोपियों ने कंचन पर उत्तर प्रदेश में उनके पिता की हाईवे किनारे स्थित जमीन में हिस्सा दिलाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

मौत से पहले की वीडियो कॉल बनी अहम सबूत

अदालत ने उस वीडियो कॉल का भी जिक्र किया, जो कंचन ने अपनी मौत से कुछ घंटे पहले अपनी भाभी को की थी। अभियोजन ने इसे डिजिटल सबूत के रूप में पेश किया। कोर्ट ने माना कि इस वीडियो कॉल से प्रताड़ना और आत्महत्या के बीच सीधा संबंध साबित होता है।

वीडियो, वॉयस रिकॉर्डिंग और गवाहों ने मजबूत किया केस

मुकदमे के दौरान मृतिका के पिता, भाई, बहन और भाभी ने अदालत में गवाही दी। इसके अलावा मोबाइल से मिले वीडियो, वॉयस रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी अदालत ने अहम माना। बचाव पक्ष इन सबूतों को गलत साबित नहीं कर सका।

कोर्ट बोली- यह आत्महत्या नहीं, दहेज प्रताड़ना का नतीजा

पोस्टमार्टम में आत्महत्या की पुष्टि हुई, लेकिन अदालत ने कहा कि इसके पीछे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ना थी। इसलिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-बी के तहत दहेज मृत्यु की धारणा लागू होती है।

नरमी से इनकार, सख्त संदेश देने की जरूरत

सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल उम्र, बीमारी या पहली बार अपराध करने का आधार राहत देने के लिए काफी नहीं है। दहेज प्रताड़ना जैसे अपराधों में कड़ी सजा जरूरी है, ताकि समाज में सख्त संदेश जाए।

अदालत ने सुनाई यह सजा

अदालत ने पति अमित राव, ससुर महेश राव, सास तारा राव, देवर अश्विन उर्फ लक्की और ननद नम्रता राव को धारा 304-बी/34 के तहत 10-10 साल का सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 498-ए/34 के तहत 3-3 साल का सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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