Uncategorized

CGPSC भर्ती घोटाला मामले में , परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर रेड में भिलाई में रिटायर्ड IAS और राज्यपाल के पूर्व सचिव के ठिकानों पर छापे; दस्तावेजों की जांच

By Dinesh chourasiya

सीजीपीएससी भर्ती परीक्षा घोटाले में रायपुर, दुर्ग-भिलाई में छापेमारी की गई है। परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के रायपुर स्थित घर में कार्रवाई चल रही है। वहीं रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित घर पर सुबह 6 बजे से जांच जारी है।

बता दें कि जेके ध्रुव सीजी-पीएससी भर्ती घोटाले में भी आरोपी हैं और फिलहाल जेल में हैं। इस कार्रवाई को भारतमाला घोटाला मामले में उनके कनेक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

वहीं राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के भिलाई तालपुरी स्थित निवास पर भी जांच चल रही है। बता दें कि उनकी बेटी नेहा का 13वीं रैंक और बेटे निखिल का 17वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था।

जेके ध्रुव के घर के बाहर सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।

जानिए क्या है CGPSC घोटाला

यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।

इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।

टामन सिंह ने रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ पहुंचाया

सीबीआई ने दलील दी कि, साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया।

जांच में सामने आया कि एक निजी कंपनी से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपए एक एनजीओ को दिए गए। जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।

प्रश्न पत्र लीक करने में रही प्रमुख भूमिका

सीबीआई का यह भी आरोप है कि, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने अध्यक्ष के निर्देश पर उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। जिन्होंने आगे यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए। दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। वहीं, सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर हुआ।

सितंबर में हुई 5 बड़ी गिरफ्तारियां

CGPSC घोटाला (2020-21) मामले में सीबीआई (CBI) ने पिछले साल सितंबर में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

इनमें तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सचिव के बेटे व डिप्टी कलेक्टर सुमित ध्रुव, पूर्व अध्यक्ष की रिश्तेदार व डिप्टी कलेक्टर मिशा कोसले और जिला आबकारी अधिकारी दीपा आदिल शामिल हैं।

यह कार्रवाई प्रशासनिक पदों पर भर्ती में हेरफेर और पक्षपात की व्यापक साजिश उजागर करने के लिए की गई।

जुलाई 2024 में दर्ज हुई थी FIR

राज्य सरकार की अधिसूचनाओं के बाद सीबीआई ने 9 जुलाई 2024 को इस मामले में एफआईआर (RC1242024A0004) दर्ज की थी।

आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारियों ने 2020 से 2022 के बीच भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी के दौरान नियमों को ताक पर रखकर परीक्षाओं और इंटरव्यू को प्रभावित किया, ताकि अपने बच्चों और करीबी रिश्तेदारों का चयन करा सकें।

कैसे हुआ फर्जी चयन और कौन-कौन हैं जेल में?

2021 की भर्ती में 1,29,206 अभ्यर्थी प्री परीक्षा में बैठे थे, जिनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा और 509 इंटरव्यू तक पहुंचे, आखिर में 170 पदों पर नियुक्तियां हुईं, जिनमें कई अफसरशाही के करीबी थे।

इस घोटाले में सीबीआई तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को भी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और सभी आरोपी फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में हैं।

जानिए क्या है भारतमाला घोटाला ?

दरअसल, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर भुगतान घोटाले में हरमीत सिंह खनूजा मुख्य आरोपी और जमीन दलाल है। हरमीत खनूजा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर हरमीत सिंह चावला की बेटी तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी।

ईडी की छानबीन में आरोपी के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों कारोबारियों के घरों से अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ED की टीमें अभी भी डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जानिए कैसे हुआ घोटाला ?

भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

Related Articles

Back to top button