दुर्ग जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त:प्राइवेट स्कूल नहीं बना सकेंगे एक ही दुकान से ड्रेस-किताब खरीदने का दवाब, शिकायत मिली तो होगी कार्यवाही हेल्पलाइन नंबर जारी
By Dinesh chourasiya

दुर्ग जिले में निजी स्कूलों की ओर से पालकों पर किताब, स्कूल ड्रेस और दूसरी सामग्री एक तय दुकान से खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिला शिक्षा विभाग ने जांच के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया है।
पालकों का आरोप है कि कई निजी स्कूल बच्चों की किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरी जरूरी सामग्री सिर्फ एक ही दुकान या फर्म से खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इससे सामान महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है। अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की शिकायतों पर तुरंत जांच होगी और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।







डीईओ ने किया कमेटी का गठन जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। जांच के लिए बनाई गई जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर अभिजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा और राज्य कर विभाग की सहायक आयुक्त रिंकी अखिलेश सोनी को शामिल किया गया है। इसके अलावा विकासखंड स्तर पर भी अलग-अलग जांच दल बनाए गए हैं। दुर्ग विकासखंड में हरिवंश मिरी और विनोद शुक्ला, पाटन में सोनाल डेविड और अर्थर्व शर्मा, जबकि भिलाई में गोशिवेंद्र तांडे और नागेंद्र देशमुख जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बढ़ी हुई फीस पर रखेगी निगरानी शिक्षा विभाग के मुताबिक, जांच समितियां निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी और किताब-ड्रेस बिक्री से जुड़ी शिकायतों पर खुद भी संज्ञान ले सकेंगी। साथ ही छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पालकों के लिए हेल्प डेस्क पालकों के लिए हेल्प डेस्क भी शुरू किया गया है। अगर किसी स्कूल की ओर से एक तय दुकान से सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता है या ज्यादा फीस वसूली की शिकायत है, तो पालक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए मान्यता कक्ष प्रभारी विपिन गनवीर को जिम्मेदारी दी गई है। शिकायत वाट्सऐप और मोबाइल नंबर 909277888 पर भी की जा सकती है।




कार्रवाई की कही जा रही बात शिक्षा विभाग का कहना है कि शिकायत मिलने पर दस्तावेजों की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन के इस फैसले से उन पालकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हर साल स्कूल खुलने के समय महंगी किताबों और ड्रेस की वजह से परेशान रहते हैं।




