दुर्ग के अंजोरा गांव में ग्रामीणों का चक्का जाम। भारतमाला प्रोजेक्ट: पुल की ऊंचाई और लंबाई बढ़ाने की मांग, बोले– ऐसे बना तो बाढ़ में डूबेंगे खेत और मूर्तियां और फसल की गाड़ियां भी फंसेगी
By Dinesh chourasiya
दुर्ग जिले में भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। अंजोरा गांव में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम किया और सड़क व पुल निर्माण के काम का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा डिजाइन से इलाके के किसानों और गांवों को भविष्य में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।








प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत यहां जो पुल और अंडरपास बनाए जा रहे हैं, उनकी ऊंचाई काफी कम है। ऐसे में फसल से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, हार्वेस्टर और गांव में बनने वाली बड़ी मूर्तियां इस रास्ते से नहीं निकल पाएंगी। किसानों के मुताबिक इस इलाके में धान खरीदी केंद्र भी है, इसलिए बड़े वाहनों का आना-जाना जरूरी रहता है।








तहसीलदार बोले- प्रपोजल भेजा है, अनुमोदन का इंतजार इस मामले में तहसीलदार वासुमित्र दीवान का कहना है कि ग्रामीणों की दो प्रमुख मांगे हैं। पहला ग्रामीण चाह रहे हैं कि 500 मीटर का कॉलम-ब्रिज बनाया जाए। दूसरा अंडरब्रिज को 5.5 मीटर करने की मांग की जा रही है। इस पर हम बात कर रहे हैं। एनएचएआई से भी हम बात कर रहे हैं। प्रपोजल भी जा चुका है, अनुमोदन का इंतजार कर रहे हैं। स्वीकृति आएगी इसके बाद ही हम आगे की कार्रवाई करेंगे। हमने कलेक्टर के माध्यम से शासन को अवगत कराया था। रिपोर्ट के आधार पर हम इस पर काम कर रहे हैं।
बाढ़ से होती है सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों ने शिवनाथ नदी पर बन रहे पुल को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पुल की मौजूदा लंबाई करीब 120 मीटर रखी गई है, जबकि इस इलाके में करीब 600 मीटर तक का क्षेत्र हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है। ऐसे में पुल की लंबाई बढ़ाकर कम से कम 500 मीटर तक करने की मांग की जा रही है ताकि बारिश के समय पानी आसानी से निकल सके और गांव व खेतों में पानी न भरे। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुल की लंबाई नहीं बढ़ाई गई तो बारिश के समय बाढ़ का पानी गांव और खेतों में भर जाएगा।
इससे किसानों की फसल को हर साल नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 2500 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि इस समस्या से प्रभावित हो सकती है। इस परियोजना से घनौद, बिरेसर, चंगोरी और अंजोरा (ख) गांव के किसान और ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सड़क की मौजूदा डिजाइन से खेतों में पानी भरने और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ सकता है।
2025 में भी कर चुके हैं आंदोलन ग्रामीण अनिल देवांगन ने बताया कि इससे पहले 17 जुलाई 2025 को भी ग्रामीणों ने इन्हीं मांगों को लेकर काम रोको आंदोलन किया था। उस समय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और छह महीने के भीतर समस्या का समाधान करने का भरोसा दिया था। ग्रामीणों ने उस भरोसे पर आंदोलन वापस ले लिया था। लेकिन अब आठ महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। इसी वजह से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है और उन्होंने फिर से आंदोलन का रास्ता चुना है। इसी वजह से आज चक्का जाम किया गया है।




