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आच्छादित है. इसे गिरिवन क्षेत्र कहा जाता था, लेकिन कालांतर में गरियाबंद कहलाया जाता है.गाँव के बुजुर्गों का कहना हैं कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई व गोलाई बढ़ती गई। जो आज भी जारी है। भूमि, जल, अग्नि, आकाश और हवा पंचभूत कहलाते हैं. इन सबके ईश्वर भूतेश्वर हैं. समस्त प्राणियों का शरीर भी पंचभूतों से बना है. इस तरह भुतेश्वरनाथ सबके ईश्वर हैं. उनकी आराधना/ सम्पूर्ण विष्व की आराधना है. भुतेश्वरनाथ प्रांगण अत्यंत विशाल है. यहां पर श्री गणेश मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, श्री राम जानकी मंदिर, यज्ञ मंडप, दो सामुदायिक भवन, एक सांस्कृतिक भवन तथा बजरंग बली का मंदिर है. भुतेश्वरनाथ समिति तथा अनेक श्रध्दालुओं द्वारा यह निर्माण हुए हैं, जो भुतेश्वरनाथ धाम को भव्यता प्रदान करते हैं. वन आच्छादित सुरम्य स्थलि बरबस मन को मोह लेती है, समय-समय पर यहां भक्तजन रूद्राभिषेक कराते हैं. हर महीने यहां भक्तजनों का तांता लगा रहता है.

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