छत्तीसगढ़

भिलाई के रामनगर मुक्तिधाम में 10 दिन से लकड़ी का स्टॉक खत्म: लाशों को जलाने के लिए बाहर से खरीदनी पड़ रही लकड़ी, गरीब वर्ग हो रहा है परेशान

By Dinesh chourasiya

भिलाई नगर निगम की तरफ से संचालित रामनगर मुक्तिधाम में 15 दिन से लकड़ी का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो गया है। ऐसे में 101 रुपए में लकड़ी और कंडा देने की योजना फेल होती दिख रही है। यहां अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को बाहर से लकड़ी खरीदनी पड़ रही है।

जल्द खत्म हो जाएगी समस्या- इंचार्ज

मुक्तिधाम के इंचार्ज कृष्ण कुमार देशमुख का कहना है कि लकड़ी का स्टॉक खत्म हुए मात्र एक दिन हुआ है। निगम आयुक्त से उनकी बात हुई है। 24 घंटे के अंदर स्टॉक पहुंच जाएगा। यहां पूरी तरह से लकड़ी खत्म नहीं हुई है। मोटी लकड़ी बेस के लिए मुक्तिधाम से दी जा रही है। पतली लकड़ी लोगों को बाहर से खरीदना पड़ रहा है। जल्द ही यह समस्या भी खत्म हो जाएगी।

टेंडर खत्म होने से समस्या हो रही

मुक्तिधाम में हमेशा लकड़ी का स्टॉक रहे, इसके लिए निगम नियमित रूप से इसका टेंडर करता है। फिलहाल पुराना टेंडर समाप्त हो जाने और नया टेंडर जारी नहीं होने से यह समस्या हुई है। नया टेंडर नहीं होने के कारण एमआईसी में पुरानी दर से करीब 20 फीसदी राशि बढ़ाकर 24 लाख रुपए प्रति वर्ष कर नई एजेंसी को काम दिया जा रहा है। यह एजेंसी जल्द ही सप्लाई शुरू कर देगी।

हर दिन होते हैं 6-7 अंतिम संस्कार

निशुल्क लकड़ी की सुविधा होने पर दूर-दूर से लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। यहां हर दिन 6-7 शवों को जलाया जाता है। एक शव को जलाने में साढ़े 4 क्विंटल लकड़ी लगती है। इस आधार पर रोजाना लगभग 30-32 क्विंटल लकड़ी का उपयोग होता है।

अंतिम संस्कार के लिए आए रामनगर निवासी श्याम का कहना है कि मुक्तिधाम में पिछले 15 दिनों से लकड़ी नहीं है। वो यहां अंतिम संस्कार के लिए आए तो बोला गया कि लकड़ी और कंडे का स्टॉक खत्म है। इसलिए उन्हें दूसरे जगह से 2 हजार की लकड़ी और एक हजार की राल खरीदनी पड़ी।

इसके बाद उनका अंतिम संस्कार कार्यक्रम संपन्न हुआ। निगम को यह सुविधा रुकने नहीं देना चाहिए, लेकिन अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं

गरीबों को होती है अधिक परेशानी

स्थानीय निवासी विश्वनाथ देवांगन का कहना है कि मुक्तिधाम में लकड़ी की काफी किल्लत है। उनको लकड़ी बाहर से खरीदकर लाना पड़ा। अमीर लोगों को फर्क नहीं पड़ता, लेकिन गरीबों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उन्हें लोगों से लकड़ी के लिए उधारी तक लेना पड़ रहा है। निगम बेस डालने के लिए मोटी लकड़ी तो दे रहा है, लेकिन बाकी की लकड़ी उन्हें खरीदकर लानी पड़ रही है।

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