छत्तीसगढ़

जमीन विवाद का मामला अपने पक्ष में कराने प्रभारी तहसीलदार सोनू अग्रवाल पर दबाव बनाने झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप

By Dinesh chourasiya

 

 

तहसील सकोला के प्रभारी तहसीलदार पर झूठे एवं मनगढ़ंत आरोप से राजस्व अधिकारी संघ है नाराज

वन भूमि के पट्टे एवं कब्जे को लेकर दो आदिवासी परिवार में के बीच चल रहे विवाद में कुछ विवादित लोग निजी स्वार्थ से प्रेरित होकर प्रभारी तहसीलदार सोनू अग्रवाल के खिलाफ झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप लगाकर प्रभारी तहसीलदार को दबाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं जिससे राजस्व अधिकारियों में रोष है। आरोप लगाने वालों को शायद यही नहीं पता कि राजस्व न्यायालय के अधिकारी तथ्यों, सबूत एवं गवाह के आधार पर नियमानुसार चलते हैं तथा वे भी कानून से बंधे होते हैं।

 

पूरा मामला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के सकोला तहसील के ग्राम तिलोरा का है जहां वन भूमि के पट्टे एवं कब्जे को लेकर दो आदिवासी परिवारों में लंबे समय से विवाद की स्थिति निर्मित है। इस पूरे मामले में चल रहे विवाद के बाद गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश दिए गए हैं परंतु जांच चलते रहने के दौरान ही जमीन विवाद के एक पक्ष कार द्वारा अपने जाति विशेष के नेताओं को आगे कर कर प्रभारी तहसीलदार सोनू अग्रवाल पर दबाव बनाने की कोशिश करते हुए मामला अपने हित में कराने की कोशिश की जा रही है तथा मामले को अतिरंजित रूप देते हुए मनगढ़ंत आरोप लगाया जा रहा है कि जांच अधिकारी तहसील के प्रभारी तहसीलदार सोनू अग्रवाल एक लाख रुपए की डीलिंग पर रामलाल भैंना की जमीन को दशरथ उरांव के नाम चढ़ा दिया है जिससे हत्या की स्थिति निर्मित हो रही है। इस प्रकार के झूठे और मनगढ़ंत और आप लगाने के पूर्व अपना हित साधने वाले यह भी नहीं समझ रहे हैं कि अभी पूरी प्रक्रिया जांच के अधीन है तथा न्यायालय संविधान के अनुसार चलता है दोनों पक्षों को सुनवाई और अपने पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है ना की एक पक्ष की बात सुनकर निर्णय दे दिया जाता है । जमीन का विवाद दो पक्षों रामलाल भैना एवं दशरथ उरांव के बीच में है जिसमें रामलाल भैना का पक्ष है कि वह ग्राम पंचायत तिलोरा के अमली डांड में वन भूमि क्रमांक 1458/06 वर्ष 1990 एवं 91 से अपने परिवार के साथ काबिज है। रामलाल भैना यहां स्थित भूमि से 2 एकड़ को खेती योग्य बनाकर खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे वही दशरथ उरांव के परिवार का कहना है कि यह वन भूमि उसके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में है तथा जुताई एवं बुवाई कर पीढ़ी दर पीढ़ी खेती की जा रही है उक्त जमीन पर दावा करने वाला पक्ष झूठे दस्तावेजों के आधार पर दूसरी जमीन पर कब्जा पाना चाहता है । इस मामले में दोनों पक्ष पुलिस प्रशासन एवं राजस्व प्रशासन में अपना अपना पक्ष लगातार रख रहे हैं तथा दोनों पक्षों के द्वारा पुलिस चौकी में एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है तथा प्रभारी तहसीलदार इस मामले की विधिवत जांच कर रहे हैं। बरसात के समय कृषि भूमि पर सीमांकन इत्यादि का कार्य अवरुद्ध होने के कारण अभी तक वहां दोनों पक्षों के बीच सीमांकन वगैरह भी नहीं किया जा सका है इस बीच कतिपय स्वार्थी तत्व प्रभारी तहसीलदार पर झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसे दबाव में लेकर मामला अपने पक्ष में कराने के लिए तहसीलदार सोनू अग्रवाल पर निराधार आरोप लगा रहे हैं तथा राजस्व अधिकारी का मनोबल गिराने का प्रयास कर रहे हैं जिससे राजस्व अधिकारी संघ ने संज्ञान में लेकर उचित वैधानिक कार्यवाही करने की तैयारी में है। हालांकि इस संबंध में प्रभारी तहसीलदार सोनू अग्रवाल ने अपनी ओर से कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उचित जांच कर कार्यवाही की जाएगी।

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