CG में जनता की सुरक्षा सिर्फ-कागजों में रहेगी या फील्ड में दिखेगी:बिजली गिरने और करंट से मौतों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जनहित-याचिका पर हुई सुनवाई
By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में आए दिन आकाशीय बिजली, नंगे तारों और खेतों-बाड़ों में अवैध रूप से बिछाए गए करंट से लगातार हो रही मौतों पर हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सख्त टिप्पणी भी की है।







वहीं, राज्य शासन और बिजली कंपनी से पूछा है कि, आम जनता की सुरक्षा के लिए सिर्फ कागजी आदेश जारी होंगे या जमीन पर भी कोई ठोस बदलाव भी दिखेगा? हाईकोर्ट ने यह भी सवाल किया कि इस संबंध में बनाए जा रहे एसओपी का क्या हुआ? डिवीजन बेंच ने सीएसपीडीसीएल से 18 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। केस की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
बिजली कंपनी का जवाब-ठेकेदार के टेस्ट रिपोर्ट देने का आदेश समाप्त




हाईकोर्ट के 6 जुलाई 2026 के पालन में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड एमडी ने व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश किया।
शपथ पत्र से चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड-2011 के क्लॉज 5.35 के तहत लो-टेंशन उपभोक्ता को नया कनेक्शन लेने या वायरिंग पूरी होने के बाद लाइसेंसी ठेकेदार की टेस्ट रिपोर्ट स्थानीय कार्यालय में जमा करना अनिवार्य होता था। लेकिन बिजली कंपनी के शपथ पत्र में बताया गया कि इस अनिवार्य शर्त को 2 मार्च 2026 को ही एक आदेश जारी कर समाप्त कर दिया गया है।
हाई-लेवल कमेटी बनाएगी एसओपी
हाईकोर्ट को बताया गया कि बिजली हादसों की रोकथाम और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 20 जुलाई 2026 को एक विशेष कमेटी गठित की गई है। इसमें सीएसपीडीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है। यह कमेटी एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करेगी।
सुरक्षा मापदंडों का अभाव और फेंसिंग में करंट से मौतें
सीएसपीडीसीएल के एमडी के शपथ पत्र के अनुसार करंट से होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं बिना न्यूनतम सुरक्षा मापदंडों के किए जा रहे निर्माण कार्यों और खेतों-बाड़ों की फेंसिंग जालियों में करंट दौड़ाने के कारण हो रही हैं।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी सेफ्टी रेगुलेशन 2023 और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 48 का पालन करते हुए कंपनी ने वरिष्ठ अधिकारियों एवं क्षेत्रीय अपर मुख्य अभियंताओं को इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑफिसर घोषित किया है। बताया कि हुकिंग रोकने और सुरक्षा के साथ बिजली उपयोग करने के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कार्यशालाएं और जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा- कागजों में नहीं, फील्ड में दिखे असर
हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और बिजली कंपनी के एमडी को निर्देश दिया कि केवल सर्कुलर जारी करने या कमेटी बना देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। एसओपी की स्टेटस रिपोर्ट पेश करें।
बताएं कि 20 जुलाई को गठित कमेटी ने एसओपी और सेफ्टी पॉलिसी के क्रियान्वयन में अब तक क्या-क्या ठोस काम किया है? बिजली बुनियादी ढांचे की निरंतर जांच, मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन के क्या कदम उठाए गए?




