छत्तीसगढ़

दुर्ग पुलिस बनी हाईटेक  पलक झपकते ही खुल जाएगी अपराधियों के हिस्ट्री  सॉफ्टवेयर बनकर तैयार 

By Dinesh chourasiya

फेस का डेटा स्टोर करने वाला सॉफ्टवेयर दृष्टि नयन, इंंजीनियरिंग स्टूडेंट्स इसके बारे में जानकारी देते हुए। - Dainik Bhaskar

दुर्ग पुलिस ने बीआईटी दुर्ग के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के साथ मिलकर एक चेहरे की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस सॉफ्टवेयर के बाद से दुर्ग पुलिस और स्मार्ट हो गई है। Facial Recognition Software में दुर्ग पुलिस सभी अपराधियों का फेस डेटा रखेगी। इसके बाद किसी भी संदेही का फोटो खींचकर डालते ही सॉफ्टवेयर उसके अपराध की कुंडली चंद सेकंड में बता देगा।

दुर्ग एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि बीआईटी के पांच इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने मिलकर राज्य में पहली बार इस तरह का Software तैयार किया है। Software बनाने वाले स्टूडेंट्स विपिन गौतम, शुभम भगत, प्रथम साहू, यशवर्धन सिंह और राजकुमार सिंह ने बताया कि वो कंप्यूटर साइंस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स हैं। उन्होंने दुर्ग पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा को अपने सॉफ्टवेयर के बारे में बताया था। उन्हें ये काफी पसंद आया। इसके बाद दुर्ग पुलिस ने उन्हें अपना CCTNS का नेटवर्क दिया और उन्होंने उसके आधार पर ये सॉफ्टवेयर बनाया।

इस तरह वाट्सऐप से जुड़कर काम करेगा सॉफ्टवेयर।
इस तरह वाट्सऐप से जुड़कर काम करेगा सॉफ्टवेयर।

विपिन गौतम ने बताया कि उन्होंने सॉफ्टवेयर का नाम दृष्टि नयन रखा है। इसे कोडिंग विजर्ड में डेवलप किया है। इसमें 5 हजार से अधिक क्रिमिनल डेटा है। इन सभी के फेस इन कोड सॉफ्टवेयर में सेव किए गए हैं। जैसे ही पुलिस किसी अपराधी की फोटो खींचकर इस सॉफ्टवेयर से जुड़े वाट्सऐप ग्रुप में डालेंगे तो कुछ सेंकेंड में उस अपराधी के बारे में जानकारी आ जाएगी। विपिन ने बताया कि ये सॉफ्टवेयर पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे कोई भी हैक नहीं कर सकता है।

इन पांच इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने मिलकर बनाया है सॉफ्टवेयर।
इन पांच इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने मिलकर बनाया है सॉफ्टवेयर।

गश्त के दौरान पुलिस को मिलेगी मदद
दुर्ग एसपी ने बताया कि रात में जब पुलिस गश्त पर होती है तो उन्हें कई संदेही मिलते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वो उन्हें छोड़ देते हैं। इस सॉफ्टवेयर की मदद से वो उस संदेही का फोटो लेकर डालने से ये जान पाएंगे कि उसके खिलाफ किस थाने में कितने अपराध हैं। इसके बाद वो उसे थाने ले जाकर उससे पूछताछ भी कर पाएगी। इससे अपराधियों को पकड़ने में तेजी आएगी।

सॉफ्टवेयर के बारे में प्रोजेक्टर के जरिए जानकारी देते इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स।
सॉफ्टवेयर के बारे में प्रोजेक्टर के जरिए जानकारी देते इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स।

इन लोगों का फेस डेटा किया जाएगा स्टोर
इस सॉफ्टवेयर में जेल से छूटने वाले बदमाश, निगरानी बदमाश, वारंटी और पुलिस थाने में छोटे या बड़े अपराध में जेल जाने वालों का फेस डेटा रखा जाएगा। इससे उनकी पूरी डिटेल पुलिस के पास रहेगी। अगर वो रात में कहीं भी संदेहास्पद गतिविधि में दिखे तो उन्हें आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

आगे और डेवलप किया जाएगा सॉफ्टवेयर
दुर्ग पुलिस इस सॉफ्टवेयर को आगे और डेवलप करेगी। पुलिस का कहना है कि वो इस सॉफ्टवेयर को और अधिक डेवलप कर उसमें अपराधियों की मोशन एक्टिविटी का रिकॉर्ड स्टोर करेगी। इससे किसी भी अपराध में वीडियो फोटो या सीसीटीवी फुटेज मिलने पर सॉफ्टवेयर की मदद से अपराधी के बारे में जानकारी जुटाई जा सकेगी।

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