छत्तीसगढ़ की मस्जिदों-दरगाहों में होगा ध्वजारोहण, गाया जाएगा राष्ट्रगीत:वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बोले- तिरंगे का सम्मान नहीं करने वाले पाकिस्तान चले जाएं
By Dinesh chourasiya
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के मस्जिदों-दरगाहों में ध्वजारोहण होगा। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाया जाएगा। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने इसे लेकर आदेश जारी किया है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी।







उन्होंने कहा कि तिरंगा देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। जो लोग तिरंगे का सम्मान नहीं करते, उन्हें देश में रहने का अधिकार नहीं है और ऐसे लोगों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
इस संबंध में जारी पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का हवाला दिया गया है। जारी निर्देश में कहा गया है कि 15 अगस्त को सभी मस्जिदों और मदरसों में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया जाए। वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।





तिरंगे का सम्मान जरूरी, नहीं तो होगी कार्रवाई- डॉ. सलीम
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि , स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिला पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों हो रहा है। वहीं, अब छत्तीसगढ़ की सभी मस्जिदों, दरगाहों, इमामबाड़ों और खानकाहों में ध्वजारोहण किया जाएगा। भारत सरकार के निर्देश के अनुसार ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत भी गाना होगा।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सलीम राज ने कहा कि तिरंगा देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। जो तिरंगे का सम्मान नहीं करता, उसे देश में रहने का अधिकार नहीं है। ऐसे लोगों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अगर हिंदुस्तान में रहना है तो कानून का पालन करना होगा।
पिछली बार 12 मुतवल्ली पहले ही हटाए गए
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि पिछली बार प्रदेश की 8,232 मस्जिदों, दरगाहों, इमामबाड़ों और मदरसों में ध्वजारोहण किया गया था। इस दौरान करीब 42 लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया था। इनमें से कुछ लोगों ने माफी मांग ली, जबकि 12 मुतवल्लियों को उनके पद से हटा दिया गया।
राष्ट्रीय गीत का अपमान करने पर 3 साल की सजा का नियम
अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के अनुसार, राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) का अपमान करने पर अधिकतम 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह प्रावधान राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत लागू किया गया है।
कानून के तहत राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर रुकावट डालना, सार्वजनिक रूप से उसका अपमान करना या जानबूझकर उसका अनादर करना अपराध माना जाता है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, सिर्फ राष्ट्रगीत नहीं गाने को हर स्थिति में अपराध नहीं माना जाएगा। कानून मुख्य रूप से अपमान और गायन में बाधा डालने जैसी गतिविधियों पर लागू होता है।
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