दुर्ग के इस गांव के विद्यालय में छात्रों से मारपीट के आरोप में प्रधान पाठिका सस्पेंड पेरेंट्स की शिकायत पर एक्शन अपमानजनक भाषा का भी करती थी इस्तेमाल
By Dinesh chourasiya

दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतोरा की प्रधान पाठिका ममता शांडिल्य को सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर छात्रों से मारपीट, अभद्र भाषा का प्रयोग और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे, जिनकी विभागीय जांच में पुष्टि हुई। शिक्षा संभाग दुर्ग के संयुक्त संचालक ने गुरुवार को निलंबन आदेश जारी किया।







ग्रामीणों, पालकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रधान पाठिका पर छात्र-छात्राओं से मारपीट, दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कलेक्टर और शिक्षा विभाग से शिकायत की थी। शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) दुर्ग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
DEO अरविंद मिश्रा ने बताया कि जांच दल ने स्कूल पहुंचकर ग्रामीणों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रधान पाठिका के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद रिपोर्ट संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय भेजी गई, जिसके आधार पर निलंबन का आदेश जारी किया गया।




छात्राओं में डर का माहौल बनने का जिक्र
निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्रधान पाठिका के व्यवहार से विद्यालय की छात्राओं में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था। पालकों और जनप्रतिनिधियों में भी उनके प्रति नाराजगी थी। विभाग के अनुसार इससे स्कूल का शैक्षणिक और अनुशासनात्मक वातावरण प्रभावित हुआ।
आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला
संभागीय संयुक्त संचालक ने आदेश में कहा कि प्रधान पाठिका का आचरण शासकीय दायित्वों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना, लापरवाहीपूर्ण और स्वैच्छाचारी था। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, दुर्ग रहेगा।
18 जुलाई की घटना बनी विवाद की वजह
ग्रामीणों के अनुसार 18 जुलाई को एक छात्र को कथित रूप से कांटेदार डंडे से पीटा गया, जिससे उसके हाथ में चोट आई। आरोप है कि स्कूल के पीछे जाने का कारण पूछने पर उसके साथ मारपीट की गई। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी कई बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा चुका था।

बच्चों ने लगाए अपमानजनक व्यवहार के आरोप
स्कूल के एक छात्र ने आरोप लगाया कि प्रधान पाठिका अक्सर कहती थीं, “पढ़ना है तो पढ़ो, नहीं तो टीसी लेकर चले जाओ।” छात्र अमृत पाल ने आरोप लगाया कि उसके मोटापे का मजाक उड़ाया जाता था। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे चाय बनवाई जाती थी और निजी काम भी कराए जाते थे। इन आरोपों की विभागीय जांच और आगे की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।
मार्च में भी की गई थी शिकायत
ग्रामीणों के अनुसार प्रधान पाठिका के खिलाफ मार्च 2026 में भी शिक्षा मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई थी। उनका आरोप था कि उस समय जांच शुरू हुई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल की घटना के बाद ग्रामीण, पालक, जनप्रतिनिधि और स्कूली बच्चे डीईओ कार्यालय पहुंचे और निलंबन की मांग की।
12 बिंदुओं पर दर्ज हुई थी शिकायत
शिकायत पत्र में बच्चों से मारपीट, गाली-गलौज, कथित जातिसूचक टिप्पणी, शिक्षकों से दुर्व्यवहार, निजी काम करवाने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, पढ़ाई प्रभावित करने, सरकारी सामग्री के कथित दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं सहित कुल 12 बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इन सभी आरोपों की विभागीय जांच की गई।
एक सप्ताह में आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश
निलंबन आदेश के साथ जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग को एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे की विभागीय कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी। डीईओ अरविंद मिश्रा ने कहा कि विभाग पहले ही सभी शिक्षकों को छात्रों के साथ शारीरिक दंड और मानसिक प्रताड़ना पर पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश दे चुका है। ऐसे मामलों में नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है





