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पहली ही बारिश में लबालब हुए नवा तरिया और जल संरचनाएं, जल संरक्षण अभियान का दिखा असर

गुण्डरदेही की 117 ग्राम पंचायतों में 23,575 जल संरक्षण कार्य पूर्ण, भू-जल रिचार्ज और किसानों को सिंचाई का मिलेगा बड़ा लाभ

रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)

बालोद, 07 जुलाई 2026

 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चन्द्रवंशी के मार्गदर्शन में ’जल संरक्षण जनभागीदारी अभियान’ के अंतर्गत जनपद पंचायत गुण्डरदेही की सभी 117 ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के कार्य कराए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा ’मोर गांव मोर पानी’ महा अभियन का शुभारंभ 24 अप्रैल 2026 को किया गया, जिसमें गांवों के पानी को गांव में ही रोकने हेतु प्रेरित किया गया। महाअभियान के तहत 23,575 जल संरक्षण कार्यों का निर्माण किया गया, जिनमें नवा तरिया, रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, परकोलेशन टैंक, आजीविका डबरी, चेकडेम एवं ट्रेंच निर्माण पूर्ण करा लिया गया है। मानसून की पहली ही बारिश में इन सभी नव-निर्मित जल संरचनाओं में पानी का भराव होना प्रारंभ हो गया है। विशेष रूप से ट्रेंच, परकोलेशन टैंक, आजीविका डबरी एवं नवा तरिया में पर्याप्त मात्रा में जल संग्रहित होने से अभियान की उपयोगिता और प्रभावशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। किसानों को इस अभियान से प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालीन लाभ प्राप्त होंगे। खेतों के आसपास वर्षा जल का अधिकतम संचयन होने से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी, रिज टू वेली के आधार पर जनपद पंचायत गुण्डरदेही में तवेरा नाला का पुनरूद्धार किया गया है, जिसमें विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण किया गया। जिससे जल संचयन और भूजल रिचार्ज होगा।  

 

 

   ट्रेंच और परकोलेशन टैंकों में पानी रुकने से गांवों के हैंडपंप, नलकूप (बोरवेल), तालाब और नाले रिचार्ज हो रहे हैं। इससे भीषण गर्मी में भी पानी की किल्लत नहीं होगी। आजीविका डबरी और तालाबों में पानी एकत्रित होने से किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए भरपूर पानी मिलेगा, जिससे उनकी फसल पैदावार बढ़ेगी तथा उनके आय में वृद्धि होगी। आजीविका डबरियों के माध्यम से किसान न केवल सिंचाई कर पा रहे हैं, बल्कि मछली पालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों से अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं। गांवों के तालाबों और नालों में पानी की उपलब्धता बनी रहने से ग्रामीणों और पशुधनों के लिए निस्तारी की समस्या का हमेशा के लिए समाधान हो गया है। साथ ही जल संरक्षण के माध्यम से कृषि उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई लागत में कमी तथा ग्रामीणों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। जिले में जनभागीदारी से संचालित यह अभियान जल संरक्षण के क्षेत्र में एक अनुकरणीय पहल बनकर उभरा है। ग्रामीणों ने भी श्रमदान एवं सक्रिय सहभागिता के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

 

प्रथम वर्षा के साथ जल संरचनाओं का भरना इस बात का प्रमाण है कि जिले में किए गए जल संरक्षण कार्य आने वाले समय में जल संकट को कम करने, भू-जल पुनर्भरण बढ़ाने तथा किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जल संरक्षण जन भागीदारी का यह मॉडल गुंडरदेही के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहली बारिश में ही पानी का यह ठहराव आने वाले सुनहरे कल का संकेत है।

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