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मौसम के अनुसार करें खरीफ फसलों की बुवाई, वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन: कृषि विज्ञान केंद्र बालोद

केवीके ने जारी की मौसम आधारित कृषि सलाह, किसानों को बीजोपचार, उन्नत किस्मों और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की अपील

 

रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)

बालोद, 06 जुलाई 2026

 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बालोद द्वारा जिले के किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया गया है। आगामी दिनों में अधिकांश समय आसमान में बादल छाए रहने तथा हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना को देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई एवं अन्य कृषि कार्य वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार करने की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कहा है कि समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीजों का उपयोग तथा बीजोपचार जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को धान, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली एवं मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की उन्नत एवं अनुशंसित किस्मों के प्रमाणित बीजों की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित करने की सलाह दी है। धान की इंद्रावती, एमटीयू-1153, विक्रम टीसीआर एवं छत्तीसगढ़ धान-1919, सोयाबीन की आरएससी-10-46, आरएससी-11-15 एवं आरएससी-11-07, अरहर की छत्तीसगढ़ अरहर-1, छत्तीसगढ़ अरहर-2 एवं राजीवलोचन तथा मक्का एवं मूंग की अनुशंसित किस्मों का चयन करने पर विशेष बल दिया गया है। 

धान की खेती के संबंध में वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान समतल खेत में सीड ड्रिल अथवा अन्य उपयुक्त यंत्रों से लगभग 20 सेंटीमीटर की कतार दूरी रखते हुए बुवाई करें तथा बीज की गहराई 3 से 4 सेंटीमीटर से अधिक न रखें। बुवाई से पूर्व बीजों का नमक घोल, एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी कल्चर से उपचार करना लाभकारी रहेगा। कतार बोनी अपनाने से खरपतवार नियंत्रण आसान होता है तथा फसल 10 से 15 दिन पहले पकती है। निंदानाशकों का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही करने की सलाह दी गई है। 

सोयाबीन उत्पादक किसानों को 45 सेंटीमीटर कतार दूरी तथा 7 से 10 सेंटीमीटर पौध दूरी पर बुवाई करने, राइजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने तथा संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इसी प्रकार अरहर की फसल में किस्म के अनुसार 60 से 90 सेंटीमीटर कतार दूरी रखते हुए बुवाई करने तथा बीजोपचार के बाद अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। मूंगफली की बुवाई 30 से 40 सेंटीमीटर कतार दूरी एवं 8 से 10 सेंटीमीटर पौध दूरी पर करने तथा ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम एवं पीएसबी से बीजोपचार करने की अनुशंसा की गई है। मक्का की फसल में संकर एवं संकुल किस्मों के अनुसार उचित बीज दर, कतार दूरी एवं उर्वरक प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया गया है। गन्ना उत्पादक किसानों को सफेद मक्खी की निगरानी करते रहने तथा आवश्यकता होने पर मौसम साफ रहने की स्थिति में अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। उद्यानिकी फसलों के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र ने वर्षाकालीन सब्जियों जैसे भिंडी, बैंगन, मिर्च, खीरा, लौकी, कद्दू, मूली एवं फूलगोभी की खेती के लिए खेत तैयार करने तथा गुणवत्तायुक्त बीजों की व्यवस्था करने की सलाह दी है। लौकी एवं कुम्हड़ा की पौध पॉलीबैग में तैयार करने तथा करेला एवं बरबट्टी की खेती मेड़-नाली पद्धति से करने की अनुशंसा की गई है। अदरक एवं हल्दी की फसल में मल्चिंग एवं जल निकास की समुचित व्यवस्था तथा पपीता, केला, आम, अमरूद, नींबू एवं अनार जैसी फलदार फसलों में उचित सिंचाई, कटाई-छंटाई एवं रोग प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है। पशुपालन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों को पशुओं का गलघोटू एवं लंगड़ा बुखार के विरुद्ध समय पर टीकाकरण कराने, दुधारू पशुओं को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी, हरा चारा, सूखा चारा एवं मिनरल मिश्रण उपलब्ध कराने तथा नवजात बछड़ों को जन्म के दो घंटे के भीतर खीस पिलाने की सलाह दी है। मुर्गीपालकों को रानीखेत रोग से बचाव हेतु निर्धारित समय पर टीकाकरण कराने के लिए भी कहा गया है। 

कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जारी सलाह का पालन करते हुए बुवाई, उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण एवं पौध संरक्षण के सभी कार्य मौसम की अनुकूल परिस्थितियों में ही करें। वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम करते हुए अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा खरीफ मौसम में संभावित मौसमीय जोखिमों से अपनी फसलों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

 

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