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राजनांदगांव में  22 करोड़ का ओवरब्रिज बारिश में दो ​हिस्सों में बंटा 15 दिन पहले हुआ था लोकार्पण,कोरबा में भी 3 करोड़ की पुलिया ध्वस्त

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ़ और राजनांदगांव के बीच बरगा रेलवे ओवरब्रिज बारिश के बाद बीच से फट गया और दो हिस्सों में बंट गया। पुल पर करीब 60–70 फीट लंबी और 10–12 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें आ गईं, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।

वहीं, आलीवारा ओवरब्रिज की हालत भी बिगड़ गई है, जहां सड़क का हिस्सा बह गया, किनारे की बाउंड्री टूट गई और कई जगह बेस धंस गया। सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।

ब​तादें कि बरगा और आलीवारा में 20 से 22 करोड़ की लागत से दोनों रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण किया गया था। लोकार्पण पिछले महीने जून में हुआ था।

इसी तरह, कोरबा जिले के करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत भैसामुड़ा स्थित जोगीनाला पर करोड़ों रुपए की लागत से बनी पुलिया भी पहली ही बारिश में ध्वस्त हो गई। तेज बहाव में पुलिया का एक हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए और आवागमन बाधित हो गया।

अब जानिए पूरा मामला

राजनांदगांव में रविवार को दो नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद क्षतिग्रस्त हो गए। लगभग 20 से 22 करोड़ रुपए की लागत से बने इन पुलों को पहली बारिश भी झेल नहीं पाई और जगह-जगह से दरारें आ गई। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहला मामला डोंगरगढ़ और राजनांदगांव के बीच बरगा स्थित रेलवे ओवरब्रिज का है, जहां की सड़क रविवार सुबह हुई बारिश के बाद बीच से फटकर दो भागों में बंट गई। पुल पर करीब 60 से 70 फीट लंबी और 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। यह दरारें पुल की नींव की कमजोरी की ओर इशारा कर रही हैं।

रेलवे ओवरब्रिज का लोकार्पण पिछले महीने जून में हुआ था।

दूसरा मामला आलीवारा ओवरब्रिज का है। वहां की स्थिति भी खराब हो गई है। इसकी सड़क बह गई है, किनारे के हिस्से बाउंड्री से अलग हो गए हैं और तीन-चार जगहों पर पुल का बेस धंस गया है। इन धंसे हुए हिस्सों को छिपाने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं।

बरगा ओवरब्रिज पर दरारें बढ़ने के बाद ग्रामीणों में हादसे की आशंका को लेकर गुस्सा फैल गया। उन्होंने बारिश के बीच पुल पर इकट्ठा होकर रेलवे और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।

ग्रामीणों के प्रदर्शन और पुलों की गंभीर स्थिति के बावजूद, मौके पर रेलवे या स्थानीय प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। इस मामले पर नागपुर मंडल के पीआरओ फैज खान ने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी मिली है और वे संबंधित अधिकारियों को इससे अवगत कराएंगे।

पुल पर मौजूद एक स्थानीय युवा और कुछ ग्रामीणों ने पुल के निर्माण पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसमें इस्तेमाल किया गया सीमेंट सही गुणवत्ता का नहीं है और वह पाउडर की जगह टुकड़ों जैसा लग रहा है।

ग्रामीण इसे भ्रष्टाचार का मामला बता रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि पुल की सड़क की गिट्टी और डामर हाथ से ही उखड़ जा रहे हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर शक हो रहा है।

गोंदिया रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर मिथिलेश कुमार ने कहा कि इसे रेक्टिफाई (ठीक) किया जाएगा और एक-दो बारिश के बाद यह ठीक से कॉम्पैक्ट हो जाएगा। रेलवे पूरी सावधानी बरत रही है और उनकी टेक्निकल टीम तथा डिजाइनर कल पहुंचकर इसका निरीक्षण करेंगे।

निर्माण कंपनी घई कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह घई ने बताया कि पुल के धंसने का कोई खतरा नहीं है और यह सिर्फ मिट्टी बैठने की शुरुआती प्रक्रिया है।

कोरबा के ग्राम पंचायत भैसामुड़ा स्थित जोगीनाला पर बनी पुलिया पहली ही बारिश में ध्वस्त

पहली ही बारिश में टूटा 3 करोड़ का पुल

इसी तरह कोरबा जिले के करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत भैसामुड़ा स्थित जोगीनाला पर 3 करोड़ की लागत से बनी पुलिया पहली ही बारिश में ध्वस्त हो गई। तेज बहाव में पुलिया का एक हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए और आवागमन बाधित हो गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें की गई थीं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण स्थल पर कोई सूचना पटल नहीं लगाया गया था। इससे पुलिया बनाने वाले विभाग, एजेंसी या ठेकेदार के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। निर्माण लागत, स्वीकृति तिथि और कार्यदायी संस्था जैसी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक न होने से भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ गई है।

इस मामले में सरपंच आनंद बिंझवार ने बताया कि पुल बने अभी एक साल भी नहीं हुआ है और पहली ही बारिश में इसकी हालत खराब हो गई। उन्होंने कहा कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से यह पुल ठेकेदार द्वारा बनाया गया था।

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