दुर्ग में एक पैर पर खड़े होकर अतिथि शिक्षकों ने किया प्रदर्शन:बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, हड़ताल 6वें दिन भी जारी
By Dinesh chourasiya

अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) सोमवार को आंदोलन के 6वें दिन भी डटे रहे। बारिश के बीच शिक्षकों ने धरना स्थल नहीं छोड़ा और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए एक पैर पर खड़े होकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।







शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर 1 जुलाई से प्रदेशभर में हड़ताल चल रही है। दुर्ग में भी बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक धरने पर बैठे हैं।
सोमवार को शिक्षकों ने एक पैर पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि वर्षों से प्रदेश के शासकीय स्कूलों में नियमित शिक्षकों की तरह सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो समान वेतन मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा।





शिक्षा मंत्री के निवास का किया घेराव
इससे पहले रविवार को आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया था। बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पैदल मार्च करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास पहुंचे और उनके बंगले का घेराव किया। इस दौरान शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई वर्षों से वे सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
10 वर्षों से आदिवासी क्षेत्रों में दे रहे हैं सेवा
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि, प्रदेश के राज्य अतिथि शिक्षक पिछले करीब 10 वर्षों से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों सहित विभिन्न शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, वह भी साल में सिर्फ 10 महीने के लिए।
जबकि नियमित शिक्षकों को समान कार्य के बदले कई गुना अधिक वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य शासकीय सुविधाएं मिलती हैं। शिक्षकों का कहना है कि हर नए शैक्षणिक सत्र में उन्हें दोबारा नियुक्ति का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके भविष्य को लेकर हमेशा असमंजस बना रहता है।
उनका कहना है कि इतने कम मानदेय में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय, नियमित अवकाश, मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिलतीं।

आश्वासन के बाद भी नहीं निकला समाधान
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि चुनाव के दौरान सरकार की ओर से संविलियन या समायोजन का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण प्रदेशभर के हजारों शिक्षक आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं।
धरने पर बैठे शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों संविलियन या समायोजन, समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य लंबित सुविधाओं पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा




