बिलासपुर में पेड़ के नीचे लग रहा स्कूल आसमान के नीचे पढ़ने को बच्चे मजबूर , स्कूल भवन के 12 लाख मंजूर, लेकिन भवन का निर्माण अभी तक नहीं
By Dinesh chourasiya

बिलासपुर जिले में स्टेशनपारा स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल पीपल के पेड़ के नीचे संचालित हो रहा है। स्कूल भवन नहीं होने और वैकल्पिक व्यवस्था समय पर न होने के कारण बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मामला तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम घुटकू का है।







जानकारी के मुताबिक, स्कूल का पुराना भवन जर्जर होने के बाद पिछले करीब 5 साल से कक्षाएं एक निजी मकान में लग रही थीं। लेकिन मकान मालिक ने निजी जरूरत बताते हुए मकान खाली कराकर ताला लगा दिया।
इसके बाद पिछले कई दिनों से स्कूल की कक्षाएं पेड़ के नीचे लगने लगीं। बच्चों को तेज धूप, बारिश और अन्य मौसम संबंधी परेशानियों के बीच पढ़ाई करनी पड़ी।





11.48 लाख स्वीकृत फिर भी नहीं बना भवन
बताया जा रहा है कि स्कूल के नए भवन निर्माण के लिए 11 लाख 48 हजार रुपये की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। स्कूल में शौचालय, किचन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ नए एडमिशन पर भी पड़ रहा है।
अभिभावकों ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और पालकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब भवन निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है और बजट भी स्वीकृत है, तो फिर बच्चों को इस तरह पेड़ के नीचे पढ़ने की नौबत क्यों आई।
धूप- बारिश से पेड़ से कीड़े गिरने पर दी जाती है छुट्टी
टीचर खगेश्वरी दुबे ने बताया कि धूप तेज होने या पेड़ से कीड़े गिरने पर छुट्टी करनी पड़ती है। यहां तक कि गांव में कोई शोक कार्यक्रम होने पर भी स्कूल बंद करना पड़ता है। शौचालय न होने के कारण छात्राओं और महिला शिक्षकों को भारी शर्मिंदगी के बीच तालाब की मेड़ पर खुले में जाना पड़ता है। इसी पेड़ के नीचे किताबें बांटी गईं और रसोइया के घर में मध्याह्न भोजन पक रहा है।
स्कूल में 2 टीचर, जल्द 1 टीचर रिटायर होंगे
सरपंच का कहना है कि बारिश के बाद काम शुरू होगा। इस बदहाली का असर स्कूल में छात्रों की दर्ज संख्या पर पड़ा है। अव्यवस्था से तंग आकर पालकों ने बच्चों का दाखिला कराना बंद कर दिया है, जिससे कक्षा पहली और दूसरी में शून्य एडमिशन है।
स्कूल में पांचवीं से आठवीं तक क्लास लगती है, लेकिन पहली दूसरी के सिर्फ 10 बच्चे बचे हैं। वहीं, यहां पदस्थ दो शिक्षकों में से एक 30 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
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