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दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का अनिश्चतकालीन हड़ताल:10 साल से आदिवासी इलाकों में पढ़ा रहे राज्य अतिथि शिक्षक बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, संविलियन और समान वेतन मिले

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 1 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए। शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र दुर्ग में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।

दुर्ग में अनिश्चतकालीन हड़ताल पर बैठे हैं अतिथि शिक्षक (विद्यामितान)।

शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 साल से प्रदेश के आदिवासी और दूर-दराज के शासकीय स्कूलों में पढ़ाई की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं और न ही सम्मानजनक वेतन। उनका कहना है कि अब तक सरकार ने उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया है।

काम एक जैसा तो वेतन कम क्यों? संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य अतिथि शिक्षक नियमित व्याख्याताओं की तरह ही पढ़ाई कराते हैं, लेकिन उन्हें केवल 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। यह मानदेय भी सिर्फ 10 महीने के लिए मिलता है। वहीं नियमित शिक्षकों को इससे कई गुना अधिक वेतन, सेवा सुरक्षा और दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब काम एक जैसा है तो वेतन और सुविधाओं में इतना बड़ा अंतर क्यों है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उन्हें हर साल नए शैक्षणिक सत्र में फिर से नियुक्ति का इंतजार करना पड़ता है। इससे नौकरी को लेकर हमेशा असमंजस बना रहता है। उनका कहना है कि इस वजह से हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं।

अपनी मांगों को लेकर दुर्ग में हड़ताल कर रहे शिक्षक।

छुट्टियों का भी नहीं मिल रहा लाभ संघ का कहना है कि 10 साल की सेवा के बाद भी उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय नहीं दिया जाता। इसके अलावा नियमित अवकाश और मातृत्व व पितृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से ये मांगें सरकार के सामने रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभा और विभागीय बैठकों में भी कई बार राज्य अतिथि शिक्षकों के मुद्दे उठाए गए। चुनाव के दौरान मोदी की गारंटी में भी राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) के संविलियन या समायोजन का वादा किया गया था। सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई फैसला नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी है।

इन प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे शिक्षक • मोदी की गारंटी के अनुसार राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) का संविलियन या समायोजन किया जाए। • समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए। • सभी राज्य अतिथि शिक्षकों को सेवा सुरक्षा दी जाए। • ग्रीष्मकालीन अवकाश का पूरा मानदेय दिया जाए। • मातृत्व, पितृत्व और अन्य वैधानिक अवकाश का लाभ दिया जाए। • 10 साल की सेवा को मान्यता देते हुए स्थायी और न्यायसंगत सेवा नीति बनाई जाए।

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