IPS जीपी सिंह की बहाली का रास्ता साफ:सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज की केंद्र सरकार की याचिका, कैट के आदेश को दी थी चुनौती
By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बर्खास्त IPS जीपी सिंह की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कैट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग केस को राजनीति से प्रेरित मानकर खारिज कर दिया है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भी राहत दी है।
दरअसल, 30 अप्रैल को छत्तीसगढ़ पुलिस के सीनियर अधिकारी IPS जीपी सिंह को CAT (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) से बड़ी राहत मिली थी। CAT ने 4 सप्ताह में जीपी सिंह से जुड़े सभी मामलों को निराकृत कर बहाल किए जाने का आदेश दिया था।







कौन है जीपी सिंह
- जीपी सिंह का पूरा नाम गुरजिंदर पाल सिंह है। उनका जन्म 1 जनवरी 1969 को हुआ है।
- उन्होंने बीई मैकेनिकल की डिग्री ली है। फिर UPSC क्रैक किया।
- जीपी सिंह छत्तीसगढ़ कैडर के 1994 बैच के IPS हैं।
- वे मूल रूप उड़ीसा के रहने वाले है।
- पहले मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस थे। छत्तीसगढ़ गठन होने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया।
- महासमुंद, दंतेवाड़ा के एसपी रहे हैं, दंतेवाड़ा में उनके नक्सल विरोधी अभियान को काफी सफलता मिली।
- वे बिलासपुर,रायपुर, दुर्ग के आईजी रहें हैं। एडीजी दूरसंचार, तकनीकी सेवाएं, परिवहन में रहे हैं।
- छत्तीसगढ़ के एसीबी ( एंटी करप्शन ब्यूरो) के चीफ रहे हैं।
जीपी सिंह से जुड़ा क्या है विवाद
- जीपी सिंह के यहां भूपेश सरकार के समय एसीबी की टीम ने जुलाई 2021 में छापा मारा था।
- उनके रायपुर के पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले समेत राजनांदगांव,उड़ीसा के लगभग 15 ठिकानों पर छापा मारा गया था।
- 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति और संवेदनशील दस्तावेज मिलने को आधार बनाकर भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ।
- जुलाई 2021 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के तीन दिन बाद राजद्रोह का केस भी दर्ज किया गया।
- 9 जुलाई 2021 को जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों में सीबीआई जांच की मांग की।
- एसीबी की टीम ने 6 महीने बाद जनवरी 2022 में उन्हें नोएडा से गिरफ्तार कर लिया।
- 120 दिन जेल काटने के बाद मई 2022 में उन्हें जमानत मिली।
कंपलसरी रिटायरमेंट देने से वापस बहाली तक




- 20 साल की सेवा या 50 साल की उम्र करने पर कंपलसरी रिटायरमेंट की जा सकती है।
- इस आधार पर राज्य शासन ने उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट देने के लिए केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स को अनुशंसा की।
- राज्य शासन की अनुशंसा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान कैडर के आईपीएस के नेतृत्व में समिति बनाई।
- समिति की समीक्षा के बाद 21 जुलाई 2023 को जीपी सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी।
- जीपी सिंह ने इसके खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका लगाई।
- याचिका में खुद को सेवा से हटाने को चुनौती दी गई।
- 30 अप्रैल को IPS जीपी सिंह को CAT (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) से बड़ी राहत मिली।
- CAT ने 4 हफ्ते में जीपी सिंह से जुड़े सभी मामलों को निराकृत कर बहाल किए जाने का आदेश दिया।
कैट के आदेश को फिर दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती
कैट के फैसले के बाद राज्य शासन ने उन्हें फिर से बहाल करने के लिए केंद्र सरकार से अनुशंसा की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें बहाल करने के बजाय कैट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इसके चलते उनकी बहाली का मामला अटक गया।
दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर अब फैसला आने के बाद जीपी सिंह की बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश राय और एसबीएन भाटी की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें जीपी सिंह की तरफ से सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने पैरवी की। वहीं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता हिमांशु पांडे ने उन्हें असिस्ट किया किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग के तीन अलग-अलग केस
दरअसल, IPS जीपी सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग के तीन अलग-अलग केस दर्ज किया गया था, जिसमें उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी और उन्हें लंबे समय तक जेल में भी रहना पड़ा था, जिस पर केंद्र सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी।
वहीं, जीपी सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। केस की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की बेंच ने उनके खिलाफ दर्ज तीनों FIR को निरस्त कर दिया है।
परेशान करने के लिए झूठे केस दर्ज कर फंसाया गया
हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा था है कि इस तरह से परेशान करने के लिए झूठे केस दर्ज कर फंसाया गया है। किसी भी केस में उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता के एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया और बताया कि अब उनके खिलाफ कोई केस ही दर्ज नहीं है। ऐसे में उनकी बर्खास्तगी आदेश भी निरस्त किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश राय और एसबीएन भाटी की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें जीपी सिंह की तरफ से सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने पैरवी की। वहीं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता हिमांशु पांडे ने उन्हें असिस्ट किया किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
हाईकोर्ट बोला- राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया
14 नवंबर को IPS जीपी सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR को चुनौती दी थी। उन्होंने हाईकोर्ट में एडवोकेट हिमांशु पांडेय के जरिए याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि, तत्कालीन सरकार ने उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया है। किसी में कोई साक्ष्य नहीं हैं।
इस दौरान हाईकोर्ट ने माना कि उन्हें परेशान करने के लिए बिना सबूतों के FIR दर्ज की गई थी। इनमें एक भी केस चलने लायक नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने तीनों FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।
सरकार गिराने का था आरोप
छत्तीसगढ़ के 1994 बैच के IPS अधिकारी जीपी सिंह के खिलाफ 2021 में ACB ने कार्रवाई की थी। सरकारी आवास सहित कई ठिकानों पर छापेमारी कर 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति और कई संवेदनशील दस्तावेज़ बरामद करने का दावा किया था।
इसके बाद जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ, जिसमें उन पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप था। जुलाई 2021 में उन्हें निलंबित किया गया और कुछ दिनों बाद राजद्रोह का केस दर्ज हुआ।




