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CG में 21 साल बाद बदलेगा राजिम कुंभ का मेला स्थल:संगम से 750 मीटर दूर होगा महोत्सव; लक्ष्मण झूला-चौबे बांधा के बीच बनेगी अस्थाई सड़क

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक होने जा रहा है। इस बार राजिम कुंभ महोत्सव का मेला स्थल बदला जाएगा। जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार मेला स्थल अब संगम स्थल में नहीं, बल्कि वहां से 750 मीटर दूर लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच लगेगा।

लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच अस्थाई सड़क (रेत–मुरूम) जिला प्रशासन बनाएगा। इसके अलावा यात्रियों के लिए गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। गरियाबंद जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है।

सीएम से स्वीकृति मिलने के बाद जगह बदली गई

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, राजिम कुंभ की तैयारियों को लेकर पिछले दिनों सीएम साय ने बैठक ली थी। बैठक के दौरान नए स्थल का प्रपोजल सीएम साय को दिखाया गया। सीएम साय ने भीड़ और व्यवस्थाओं को देखकर नई जगह पर सहमति दी।

बैठक में सीएम ने राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में शामिल सभी विभागों और प्रशासनिक अमले को आपस में समन्वय बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आने-जाने की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा।

भूपेश सरकार में जगह हुई थी निर्धारित

लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच मेला लगाने के लिए जगह निर्धारित हुई है। इसकी मार्किंग भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 2021 में हुआ था। 2021 में यहां पर मेला लगाने का निर्देश भी जारी किया गया था, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं हो पाने की वजह से इसको टाल दिया गया।

इतिहासकार रामेंद्र मिश्रा कहते हैं कि, नाम तो बदला लेकिन राजिम कुंभ की आस्था कम नहीं हुई। हालांकि कुंभ के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी बदहाल हो जाती है। मंदिर पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब मेला स्थल बदल रहा है, तो स्थिति प्रशासनिक अधिकारियों के नियंत्रण में रहेगी।

कुंभ में कई धर्मगुरु, साधू-संत और कथावाचक होंगे शामिल

कुंभ में महामंडलेश्वर, अखाड़ों के धर्मगुरु, कथावाचक और दूसरे देशों के संत शामिल होंगे। धर्मगुरुओं के अलावा काशी, मथुरा, बनारस, अयोध्या,अमरकंटक और चित्रकूट से बड़ी संख्या में साधु-संत भी पहुंच सकते हैं। कुंभ में एक दर्जन से ज्यादा अखाड़ों के अलावा शाही जुलूस, साधू-संतों के दरबार, झाकियों, नागा साधुओं और धर्मगुरुओं की मौजूदगी रहेगी।

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