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राज्यों को SC-ST-रिजर्वेशन के क्लासिफिकेशन का अधिकार है या नहीं:सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा; पिछली सुनवाई में कहा था- राज्य सिलेक्टिव हुए तो तुष्टिकरण बढ़ेगा

By Dinesh chourasiya

राज्यों को SC-ST कोटा रिजर्वेशन के क्लासिफिकेशन का अधिकार है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संवैधानिक बेंच आज यानी गुरुवार (1 अगस्त) को फैसला सुनाएगी।

CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की इस बेंच ने 6 महीने पहले मामले पर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट ने 8 फरवरी को पिछली सुनवाई में कहा था कि राज्य सिलेक्टिव हुए तो तुष्टिकरण तुष्टिकरण बढ़ेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट SC-ST में कोटा को लेकर दिए गए 2004 के अपने ही फैसले की समीक्षा कर रही थी।

इस दौरान जस्टिस चिन्नैया ने कहा था कि राज्यों को अनुसूचित जाति (SCs) और अनुसूचित जनजाति (STs) में कोटा के लिए सब-कैटेगरी बनाने का अधिकार नहीं है।

पिछले 3 दिन की सुनवाई में क्या-क्या हुआ…

8 फरवरी: कोर्ट ने कहा- सबसे पिछड़ों को फायदा पहुंचाने, दूसरों को बाहर वंचित नहीं कर सकते
तीसरे दिन की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि मान लीजिए बहुत सारे पिछड़े वर्ग हैं और राज्य केवल दो को ही चुनता है। ऐसे में जिन्हें बाहर रखा गया है वे हमेशा अनुच्छेद 14 के तहत अपने वर्गीकरण को चुनौती दे सकते हैं कि हम पिछड़ेपन के सभी मानदंडों को पूरा करते हैं।

बेंच ने कहा- सबसे पिछड़ों को लाभ देते समय राज्य सरकारें दूसरों को बाहर नहीं कर सकतीं। वरना यह तुष्टिकरण की एक खतरनाक प्रवृत्ति बन जाएगी। कुछ राज्य सरकारें कुछ जातियों को चुनेंगी जबकि अन्य कुछ जातियों को चुनेंगी। हमें मानदंड निर्धारित करके इसे तैयार करना होगा।

7 फरवरी: SC-ST आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक स्थिति में एक समान नहीं हो सकते
सुनवाई के दूसरे दिन कोर्ट ने कहा कि SC और ST अपनी आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक स्थिति के मामले में एक समान नहीं हो सकते हैं। ये एक निश्चित उद्देश्य के लिए एक वर्ग हो सकते हैं, लेकिन वे सभी उद्देश्यों के लिए एक कैटेगरी नहीं बन सकते।

6 फरवरी : कोर्ट ने पूछा- क्या IAS-IPS अफसरों के बच्चों को कोटा मिलना चाहिए
सुनवाई के पहले दिन पंजाब सरकार ने दलील दी कि पिछड़े वर्गों में सबसे पिछड़े समुदायों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इस पर बेंच ने सवाल किया कि पिछड़ी जातियों में मौजूद संपन्न उपजातियों को आरक्षण की सूची से क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।

बेंच ने यह भी पूछा कि क्या IAS-IPS अफसरों के बच्चों को कोटा मिलना चाहिए? जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि इन्हें आरक्षण सूची से क्यों नहीं निकाला जाना चाहिए? कुछ उपजातियां संपन्न हुई हैं। उन्हें आरक्षण से बाहर आना चाहिए। ये बाहर आकर बेहद पिछड़े और हाशिए पर चल रहे वर्ग के लिए जगह बना सकते हैं।

रिव्यू की जरूरत क्यों पड़ी
2006 में पंजाब सरकार कानून लेकर आई, जिसमें शेड्यूल कास्ट कोटा में वाल्मीकि और मजहबी सिखों को नौकरी में 50% रिजर्वेशन और प्राथमिकता दी गई। 2010 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया और कानून खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार समेत 23 याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर 6 फरवरी को सुनवाई की शुरू की।

पंजाब के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कहा सुनवाई के दौरान कहा कि भर्ती परीक्षा में 56% अंक हासिल करने वाले पिछड़े वर्ग के सदस्य को 99% हासिल करने वाले उच्च वर्ग के व्यक्ति की तुलना में प्राथमिकता दी जाए। क्योंकि उच्च वर्ग के पास हाईक्लास सुविधाएं हैं, जबकि पिछड़ा वर्ग इन सुविधाओं के बिना ही संघर्ष करता है।

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