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दुर्ग में छात्रावासों की बदहाली के खिलाफ बारिश में छात्रों का प्रदर्शन:बोले- 1200 रुपए में कैसे चलेगा गुजारा; भ्रष्टाचार की जांच और अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग

By Dinesh chourasiya

जिले के छात्रावासों में बदहाल व्यवस्थाओं और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र-छात्राओं ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर दुर्ग जिले के विभिन्न छात्रावासों के विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। खास बात यह है कि बारिश के बीच भी छात्र-छात्राएं प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं को दूर करने के बजाय अनदेखी कर रहे हैं।

छात्रों ने इस संबंध में कलेक्टर को शिकायत सौंपकर जिले के सभी छात्रावासों की व्यवस्थाओं, निर्माण कार्यों और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी अविनाश श्रीवास पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों ने उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

1200 रुपए में पूरे महीने का खर्च चलाना मुश्किल

छात्रों की प्रमुख मांग छात्रावास में मिलने वाली भोजन सहायता राशि बढ़ाने की है। शिकायत के मुताबिक, वर्तमान में प्रति छात्र प्रतिमाह 1200 रुपए भोजन सहायता के रूप में दिए जाते हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि मौजूदा महंगाई में इतनी कम राशि में पौष्टिक और पर्याप्त भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल है। उन्होंने इसे बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है।

इसके अलावा कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली के तहत सालभर पढ़ाई होती है, जबकि छात्रावासों में केवल 10 महीने की भोजन सहायता राशि मिलती है। ऐसे में बाकी दो महीने विद्यार्थियों को भोजन और अन्य जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ता है। छात्रों ने पूरे 12 महीने भोजन सहायता देने की मांग उठाई है।

जर्जर भवन, खराब शौचालय और जरूरी सामान की कमी

शिकायत में बताया गया है कि जिले के कई छात्रावासों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। इनमें मरम्मत की जरूरत है, लेकिन लंबे समय से निर्माण और रखरखाव के काम नहीं कराए गए हैं। शौचालयों की साफ-सफाई और उचित सुविधाओं का भी अभाव बताया गया है।

छात्रों ने छात्रावासों में टेबल, कुर्सी, पलंग, बेडशीट, झाड़ू, पोछा, लाइट और पंखे जैसी दैनिक जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। बारिश के मौसम में परिसर में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।

कंप्यूटर, वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें भी मांगीं

विद्यार्थियों का कहना है कि आज के दौर में पढ़ाई के लिए डिजिटल संसाधन बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद छात्रावासों में कंप्यूटर और वाई-फाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें, खेलकूद सामग्री, वाटर फिल्टर और ठंडे पानी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही मेस हॉल में टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था और नियमित साफ-सफाई कराने की मांग भी रखी है।

छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर हो रहा यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है, क्योंकि दुर्ग जिले से ही विधायक गजेंद्र यादव वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं की मांगों और छात्रावासों की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर अब जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों पर भी ध्यान देने का दबाव बढ़ रहा है।

छात्रों ने शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहब और विभागीय सचिव को भी भेजी है।

विद्यार्थियों का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से छात्रावासों में कोई ठोस निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं हुआ, जबकि मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल बारिश के बीच भी छात्रों का प्रदर्शन जारी है और सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं

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