रेप-मर्डर के दोषी को फांसी की सजा:पुणे में 65 साल के व्यक्ति ने 3 साल की बच्ची से रेप किया था; 60 दिन में फैसला
By Dinesh chourasiya
महाराष्ट्र के पुणे जिले में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या करने के आरोपी 65 साल के दोषी भीमराव कांबले को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।







कोर्ट का यह फैसला वारदात के 60 दिन बाद आया है। अदालत ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का बताते हुए कहा कि आरोपी का कृत्य बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर था।
सोमवार सुबह 11 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी को अदालत में पेश किया गया था। कांबले पेशे से मजदूर हैं। वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों के दादा हैं।





बच्ची छुट्टियों में नानी के घर आई हुई थी, बहला-फुसलाकर ले गया
यह घटना 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी। बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई हुई थी। दोपहर 3 से 4 बजे के बीच कांबले ने उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।
इसके बाद वह उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ रेप किया और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।
कोर्ट रूम LIVE
- जज एसआर सालुंखे ने कहा- यह अपराध अत्यंत जघन्य तरीके से किया गया। इसमें पीड़िता के साथ अमानवीय व्यवहार और यातना शामिल थी। पीड़िता एक मासूम, असहाय बच्ची थी। यह हत्या सेक्स के लिए की गई,जो पूर्ण रूप से नैतिक पतन को बताती है। यह बिना किसी उकसावे के ठंडे दिमाग की हत्या है। यह अपराध इतनी बेरहमी से अंजाम दिया गया कि यह न केवल न्यायिक विवेक को, बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर देता है।
- बच्ची के वकील ने कहा- कांबले सुधरने योग्य नहीं है। इससे पहले वह एक 62 साल की महिला, एक 17 साल की लड़की और एक पशु के साथ भी अपराध कर चुका है।
- कांबले के वकील ने कोर्ट में उम्र का हवाला दिया। हालांकि, कोर्ट ने माना कि अपराधी की उम्र सजा कम करने का नहीं, बल्कि सजा बढ़ाने का कारण है।
- जज ने कहा- इस उम्र में भी आरोपी की वासना की प्यास नहीं बुझी, बल्कि यह एक अत्यंत खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। पीड़िता के शरीर पर पाई गई चोटें मात्र 3 साल की बच्ची के साथ आरोपी के अमानवीय व्यवहार को उजागर करती हैं।
- जज ने कहा- आरोपी ने बच्ची के साथ जो करना चाहा वह निडरता से, अत्यंत हिंसक तरीके से और बिना किसी परिणाम की परवाह किए किया, क्योंकि उसे पूर्व अनुभव था कि मुकदमे में भी कुछ नहीं होगा।
कोर्ट ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई थी। जस्टिस सालुंखे ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था। दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने कांबले से पूछा कि उसे क्या सजा दी जानी चाहिए। इस पर कांबले ने कहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी में न तो पश्चाताप के कोई संकेत दिखाई दिए और न ही उसके सुधरने की कोई संभावना है। ऐसे में उसके लिए केवल मृत्युदंड ही उचित सजा है।
बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अजय मिसर ने 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, पीड़िता के परिजन और बाल गवाह शामिल थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।
अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए CCTV फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को वैध और पर्याप्त साक्ष्य माना।
पुणे केस के दोषी को पॉक्सो एक्ट में फांसी की सजा मिली
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012 (पॉक्सो एक्ट) कानून 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, छेड़छाड़, उत्पीड़न और अश्लील अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। 2012 के निर्भया कांड के बाद पॉक्सो कानून को और सख्त बनाया गया।
2019 में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में फांसी तक का प्रावधान जोड़ा गया। पुणे केस में दोषी को इसी के तहत फांसी की सजा मिली। इसके अलावा फास्ट ट्रैक और विशेष पॉक्सो अदालतें भी बनाई गईं।
- यौन उत्पीड़न: 3 साल तक की जेल और जुर्माना।
- यौन हमला: 3 से 5 साल तक की जेल और जुर्माना।
- गंभीर यौन हमला: 5 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना।
- रेप-मर्डर (रेयरेस्ट ऑफ रेयर): कम से कम 20 साल की जेल, आजीवन कारावास और रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों में फांसी तक का प्रावधान है।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ क्राइम के बारे में जानें…
भारत में फांसी अपवाद है, सामान्य सजा नहीं है। फांसी सिर्फ ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में होती है। क्राइम को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानने के लिए सुप्रीम कोर्ट देखता है कि अपराध कितना क्रूर और समाज को झकझोरने वाला है।
कोर्ट ने पुणे केस को क्यों माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’
- पीड़िता 3 साल की बच्ची थी।
- रेप के बाद पत्थर से सिर कुचलकर हत्या।
- शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले।
- आरोपी के खिलाफ पहले भी दुर्व्यवहार के आरोप।
- अदालत को सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिखी।
बच्चों के खिलाफ अपराध महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, देश में कुल अपराध 6% घट गए हैं। 2024 में 58.85 लाख अपराध दर्ज किए गए, जबकि 2023 में 62.41 लाख मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि बच्चों के खिलाफ देश में अपराध 5.9% बढ़े हैं। 2024 में 1.87 लाख केस दर्ज किए गए, जो 2023 में 1.77 लाख थे। सबसे ज्यादा अपहरण के मामले रहे।
NCRB के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों से यौन अपराध के अधिकांश मामलों में आरोपी कोई परिचित, रिश्तेदार, पड़ोसी या परिवार का जानकार होता है।
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