छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 में स्व-गणना शुरू:दुर्ग कलेक्टर और कमिश्नर ने भरा अपना फॉर्म; नागरिक अब घर बैठे ऑनलाइन भर सकेंगे अपनी जानकारी
By Dinesh chourasiya
दुर्ग जिले में भारत की जनगणना 2027 की तैयारियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं। इस बार जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा शुरू की गई है। गुरुवार 16 अप्रैल से जिले में नागरिकों को अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का अवसर दिया गया है।







जिला प्रशासन के अनुसार, नागरिक अब घर बैठे ही अपने परिवार से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां निर्धारित वेब पोर्टल के माध्यम से भर सकते हैं। इससे पारंपरिक घर-घर सर्वे के साथ-साथ डिजिटल भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।

दुर्ग कलेक्टर और कमिश्नर स्व-गणना पोर्टल पर अपना फॉर्म भरा




कमिश्नर एस एन राठौर और दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपने कार्यालय से स्व-गणना पोर्टल पर स्वयं अपना फॉर्म भरकर इस अभियान की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए यह प्रक्रिया सरल और सहज बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भागीदारी कर सकें। दोनों अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे निर्धारित समयावधि में इस सुविधा का लाभ उठाएं और जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय सहयोग दें।
स्व-गणना एक अभिनव डिजिटल सुविधा है, जिसके माध्यम से परिवार का कोई भी सदस्य सुरक्षित वेब पोर्टल http://se.census.gov.in पर जाकर निर्धारित प्रपत्र भर सकता है। नागरिक अपने घर, कार्यालय या किसी भी स्थान से परिवार की पूरी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर और ओटीपी आधारित सत्यापन के साथ संचालित होती है, जिससे डेटा की सुरक्षा और प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है।
इस बार मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (HLO) से जुड़े सभी प्रश्न और विकल्प ऑनलाइन पोर्टल पर उसी स्वरूप में उपलब्ध होंगे, जैसे प्रगणक के मोबाइल ऐप में होते हैं।
स्व-गणना के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम निर्धारित किए गए हैं:
- परिवार का मुखिया या कोई भी जिम्मेदार सदस्य फॉर्म भर सकता है।
- एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही स्व-गणना फॉर्म भरा जा सकेगा।
- पोर्टल सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक उपलब्ध रहेगा।
- यह सुविधा 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी।
फॉर्म सफलतापूर्वक जमा करने के बाद एक यूनिक SE ID जनरेट होगी, जो एसएमएस या ईमेल के माध्यम से प्राप्त होगी।
लोकेशन डिटेल और डिजिटल मैपिंग अनिवार्य
ऑनलाइन फॉर्म भरते समय परिवारों को अपने स्थान की सटीक जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिसमें राज्य, जिला, तहसील/ब्लॉक, गांव या नगर और वार्ड शामिल हैं। इसके साथ ही पोर्टल में डिजिटल मैप इंटरफेस भी दिया गया है, जिससे नागरिक अपने मकान का सटीक लोकेशन चिन्हित कर सकते हैं। खास बात यह है कि कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में बैठकर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकता है।
प्रगणक (Enumerator) की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण
हालांकि स्व-गणना की सुविधा शुरू हो गई है, लेकिन प्रगणकों की भूमिका अभी भी अहम बनी हुई है। 1 से 30 मई के बीच प्रगणक घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे। जिन परिवारों ने पहले ही स्व-गणना कर ली होगी, उन्हें केवल अपनी SE ID बतानी होगी। प्रगणक इस आईडी के आधार पर डेटा की जांच करेंगे और आवश्यक होने पर उसमें संशोधन भी कर सकेंगे। संशोधित डेटा को आगे सुपरवाइजर द्वारा विशेष रूप से सत्यापित किया जाएगा।
स्व-गणना से क्या होगा फायदा
नागरिकों को सुविधा और समय की बचत , डेटा संग्रहण में पारदर्शिता , तकनीक के जरिए सटीक जानकारी , प्रगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह कदम भारत को डिजिटल जनगणना की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर से किया शुभारंभ
राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास से स्व-गणना कर इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर नागरिकों को इस राष्ट्रीय अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि जनगणना देश के विकास की आधारशिला है और इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी बेहद जरूरी है।
अगर नहीं भर पाए फॉर्म तो क्या होगा
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई नागरिक ऑनलाइन स्व-गणना नहीं कर पाता है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। ऐसे में 1 मई से 30 मई के बीच प्रगणक घर-घर जाकर पारंपरिक तरीके से जानकारी एकत्रित करेंगे। यानी हर परिवार का डेटा हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।




