केंद्र सरकार ने जारी किए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, 1 अप्रैल से लागू,
By Dinesh chourasiya
केंद्र सरकार ने जारी किए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, 1 अप्रैल से लागू,
◻️थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए स्रोत स्तर पर प्रसंस्करण अनिवार्य,







◻️अपशिष्ट पृथक्करण के नए मानक लागू, लैंडफिल पर निर्भरता होगी कम,





दुर्ग, 04अप्रैल/नगर पालिक निगम दुर्ग/केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इन नए नियमों के तहत विशेष रूप से थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) और स्थानीय निकायों के लिए अपशिष्ट का स्रोत स्तर पर ही प्रसंस्करण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
नए नियमों की प्रमुख विशेषताएं
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इन नियमों का मुख्य उद्देश्य अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं जवाबदेह बनाना है।
नए नियम “अपशिष्ट सोपनिकी (Waste Hierarchy)” के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें प्राथमिकता क्रम इस प्रकार निर्धारित किया गया है—
अपशिष्ट की रोकथाम एवं न्यूनतम उत्पादन
पुनः उपयोग
पुनर्चक्रण
ऊर्जा पुनर्प्राप्ति
अंतिम विकल्प के रूप में सुरक्षित निपटान
लैंडफिल उपयोग पर सख्ती
नियमों के तहत अब केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-पुनर्प्राप्त योग्य एवं निष्क्रिय अपशिष्ट को ही लैंडफिल में भेजा जाएगा।
छटाई रहित अपशिष्ट पर अधिक लैंडफिल शुल्क लगाया जाएगा, जिससे डंपिंग को हतोत्साहित कर स्रोत स्तर पर अपशिष्ट प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल देश में चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को मजबूती प्रदान करेगी।
थोक अपशिष्ट उत्पादकों का विस्तारित दायरा
नए नियमों के अनुसार निम्नलिखित इकाइयों को थोक अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी में शामिल किया गया है
20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र वाले भवन
प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल उपयोग करने वाली संस्थाएँ
प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयाँ
इसमें आवासीय सोसायटियाँ, विश्वविद्यालय, छात्रावास, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान तथा शासकीय संस्थान शामिल हैं।
चार श्रेणियों में अनिवार्य अपशिष्ट पृथक्करण
नियमों के अंतर्गत अपशिष्ट को निम्नलिखित चार श्रेणियों में पृथक करना अनिवार्य किया गया है
गीला अपशिष्ट
सूखा अपशिष्ट
सैनिटरी अपशिष्ट
विशेष देखभाल अपशिष्ट (जैसे बैटरी, ट्यूबलाइट, ई-कचरा)
इससे पुनर्चक्रण प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और अपशिष्ट के मिश्रण से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।
थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारियाँ
नियमों के अनुसार थोक अपशिष्ट उत्पादकों को
गीले अपशिष्ट का यथासंभव स्थल पर ही प्रसंस्करण करना होगा
स्थल पर प्रसंस्करण संभव न होने पर विस्तारित उत्तरदायित्व (EBWGR) प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा
अपशिष्ट के सुरक्षित संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी
इसके साथ ही अनुपालन की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
नियमों का महत्व
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी सीधे अपशिष्ट उत्पन्न करने वालों पर निर्धारित की गई है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी एवं नगर निकायों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
यह नया ढांचा शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रसंस्करण दर बढ़ाने तथा लैंडफिल पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।जन संपर्क/राजू बक्शी




