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नवजात के माता-पिता को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश:मासूम के सामने लिखा-HIV पॉजिटिव मदर; हाईकोर्ट बोला-ये अमानवीय कृत्य, आगे ऐसी घटनाएं न हो (मामला मेकाहरा रायपुर का अस्पताल का)

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में नवजात शिशु के पास ‘HIV पॉजिटिव मदर’ लिखी तख्ती लगाने पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही राज्य सरकार को बच्चे के माता-पिता को 2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने मामले पर खुद संज्ञान लेकर जनहित याचिका की सुनवाई की। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने 4 सप्ताह के अंदर मुआवजा देने कहा है। साथ ही कहा कि ये अमानवीय कृत्य है। आगे ऐसी घटनाएं न हो।

दरअसल, 10 अक्टूबर को मीडिया रिपोर्ट में तस्वीर आई थी, जिसमें रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में एक नवजात के पास तख्ती लगाई गई थी, जिस पर ‘HIV POSITIVE MOTHER’ लिखा हुआ था।’ यह देखकर मासूम बच्चे के पिता और परिजन रो पड़े।

मीडिया रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की, जिसमें मुख्य सचिव को जांच कर व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव का जवाब- जांच के लिए बनी समिति

मुख्य सचिव ने 14 अक्टूबर को कोर्ट में अपना शपथपत्र दिया है। जिसमें बताया गया कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। समिति ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी है। वहीं, शासन की तरफ से कहा गया कि HIV/एड्स (प्रीवेंशन एंड कंट्रोल) Act, 2017 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों को गोपनीयता बनाए रखने और भेदभाव रोकने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट बोला- निजता के अधिकार का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी अस्पताल द्वारा मरीज की पहचान और बीमारी सार्वजनिक करना निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकत न केवल असंवेदनशील है बल्कि असंवैधानिक भी। यह मरीज और उसके परिवार के जीवन को सामाजिक कलंक में धकेल सकती है।

बच्चे के माता-पिता को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बच्चे के माता-पिता को दो लाख रुपए का मुआवजा चार सप्ताह में दिया जाए। साथ ही कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कड़े दिशा-निर्देश और संवेदनशीलता प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2025 को होगी, जिसमें अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

जानिए क्या है पूरा मामला

मेकाहारा में 6 अक्टूबर को एक HIV पॉजिटिव महिला ने बच्चे को जन्म दिया। मेडिकल स्टाफ ने बच्चे को PICU में शिफ्ट किया। यहां तक तो ठीक था, लेकिन इसके बाद मौजूद स्टाफ सफेद रंग का एक बड़ा चार्ट पेपर लाया। फिर कुछ कलर पेंसिल भी मंगाई गई।

इसके बाद लाल रंग के स्केच मंगाए गए। उस पर बड़े-बड़े बोल्ड अक्षरों में लिखा गया- HIV POSITIVE MOTHER (एचआईवी पॉजिटिव मदर)। ये इतना बड़ा और बोल्ड लिखा हुआ था कि 100 मीटर दूरी से भी गुजरने वाले इसे पढ़ जाए। ये चार्ट फिर उस बच्चे के नजदीक चस्पा कर दिया गया।

मेडिकल स्टाफ ने बोल्ड अक्षरों में HIV POSITIVE MOTHER (एचआईवी पॉजिटिव मदर) लिखा था।

पीड़ित मां ने पति से कहा- बच्चे के पास एक चार्ट लगा हुआ है

चार्ट 3 दिनों तक ऐसे ही लगा रहा। मां जब-जब बच्चे को दूध पिलाने जाती, ये बोर्ड उसे दिखता। वो समझ नहीं पा रही थी कि किया क्या जाए। 2 दिन बाद उसने बातों ही बातों में ये बात अपने पति को बताई। पति को PICU के भीतर जाने की इजाजत नहीं थी।

वो बच्चे को सीधे नहीं देख सकते थे। लेकिन 9 अक्टूबर को 2 मुंहे दरवाजे के खुलने और बंद होने की प्रक्रिया में कुछ सेकेंड के लिए बनने वाले स्पॉट से देखा तो आंखों से आंसू आ गए। उनके बच्चे के नजदीक ‘HIV POSITIVE MOTHER’ का चार्ट लगा हुआ था।

पिता बोले- मेडिकल स्टाफ तक दूरी बनाने लगा था

 पीड़ित पिता ने बताया कि वे भी HIV पॉजिटिव हैं। बीमारी का पता चल जाने पर बाकी सोसाइटी का तो छोड़िए मेडिकल स्टाफ के लोग भी सामान्य व्यवहार नहीं करते। ये बात तो सभी जानते हैं, इसके बाद भी गलती हुई। दुख इस बात है कि गलती को 3 दिनों तक नजरअंदाज किया गया।

आरोपी का नाम नहीं बताया गया

हालांकि, शिकायत के बाद अधिकारियों तक जैसे ही ये बात पहुंची, चार्ट पेपर तुरंत हटाया गया। मीडिया में खबर पब्लिश होने के बाद इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। इसके बाद रविवार को पूरे मामले में FIR भी दर्ज की गई।

हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन को नोटिस भी दिया गया। वहीं पुलिस के नोटिस के जवाब में प्रबंधन ने कहा है कि मामला HC में लंबित में है। वहां से सब कुछ क्लियर होने के बाद आरोपी का नाम बताया जाएगा।

NGO ने संज्ञान लिया, तब उजागर हुआ मामला

इस पूरे मामले को सुराज जनकल्याण समिति के अध्यक्ष प्रीतम महानंद और संरक्षक ने उजागर किया। प्रीतम ने बताया कि वो अपने एक पहचान वाले को देखने गए हुए थे। इसी दौरान पीड़ित पिता को रोते हुए देखा।

बात हुई तो मामला पता चला। इसके बाद आगे की कार्रवाई की गई। उन्होंने अपनी टीम के साथ जाकर मौदहापारा थाने में मामले की शिकायत भी कराई है। प्रीतम महानंद ने कहा, मैंने पीड़ित पिता की ​स्थिति आंखों से देखी। वो हॉस्पिटल में रो रहे थे। हॉस्पिटल प्रबंधन ने बड़ी गलती की है। ये गलती पीड़ित परिवार के लिए जीवन भर का दर्द है।

हॉस्पिटल प्रशासन ने कहा- विभागीय जांच चल रही है

वहीं, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने  बताया  कि मामले में कोई भी नोटिस पुलिस की ओर नहीं मिला है। इस मामले पर विभागीय जांच की जा रहा रही है। कोतवाली के सीएसपी केसरी नंदन नायक ने कहा, शिकायत के बाद हमने FIR दर्ज कर ली है। पीड़ित पिता एनजीओ की टीम के साथ थाने पहुंचे थे। हालांकि, FIR एनजीओ के सदस्य की ओर से कराई गई है।

अब जानिए HIV बीमारी के बारे में…

HIV और AIDS में क्या अंतर है इनके बीच बुनियादी फर्क यह है कि HIV एक वायरस है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। जबकि AIDS एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जो HIV संक्रमण के कारण होती है। इसका मतलब होता है कि इम्यून सिस्टम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है।

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को HIV संक्रमण नहीं है तो उसे एड्स नहीं हो सकता है। अगर HIV संक्रमित व्यक्ति को शुरुआती स्टेज में ही इलाज मिल जाए तो उसे एड्स होने से रोका जा सकता है। वहीं ट्रीटमेंट न मिलने पर लगभग सभी संक्रमित लोगों को एड्स होने का खतरा रहता है।

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