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दुर्ग में छग सहायक समिति कर्मचारी संघ की हड़ताल शुरू:तीन सूत्रीय मागों को लेकर कर रहे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

By Dinesh chourasiya

धरना प्रदर्शन करते लोग - Dainik Bhaskar

छत्तीसगढ़ सहायक सीमित कर्मचारी संघ ने सोमवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे पहले भी ये लोग अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दो बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई। इसको लेकर दुर्ग संभाग के 13000 कर्मचारी दुर्ग के मानस भवन के पास प्रदर्शन पर बैठ गए हैं।

कबीरधाम से आए जिला प्रदेश उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक सीमित कर्मचारी संघ गंगादास मानिकपुरी ने बताया कि सहकारी समितियों के कर्मचारी तीन सूत्रीय मांग को लेकर चरण बद्ध आंदोलन कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर उन लोगों ने 18 से 20 अक्टूबर तक काली पट्टी लगाकर काम किया था। इसमें प्रदेश की 2058 समितियों में कार्यरत लगभग 13000 कर्मचारियों ने अपना समर्थन दिया था।

कलेक्टोरेट दुर्ग के पास अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

इसके बाद भी जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने 21 व 22 अक्टूबर को दो दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन लोगों ने मुख्यमंत्री, खाद्य मंत्री और सहकारिता मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा था।

गंगादास मानिकपुरी का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर छ.ग. सरकार द्वारा भी प्रदेश के 2058 सहकारी समितियों को कर्मचाररियों को वेतनमान व अन्य सुविधायें लाभ दिए जाएं।

इसके साथ ही हर एक समिति को हर साल 3-3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान राशि दी जाए। 7वें सेवानियम 2018 में आंशिक संशोधन करते हुए पुनरिक्षित वेतन लागू की जाए। साथ ही साथ समर्थन मूल्य धान खरीदी वर्ष 2023-24 में धान परिदान के बाद हुई संपूर्ण सुखत मान्य करते हुए आगामी वर्षों के लिए धान खरीदी नीति में वर्णित 16.9 में सुखत मान्य का प्रावधान करते हुए धान खरीदी अनुबंध में परिवर्तन करते हुए प्रासंगिक व सुरक्षा व्यय तथा कमीशन, खाद, बीज, उपभोक्ता फसल बीमा, आदि को 2 गुणा बढ़ा कर राशन वितरण पर 500 किलो क्षतिपूर्ति एवं 5000 रुपये दी जाए।

दूसरी एजेंसी से कराई जाए धान की खरीदी

प्रदेश महासचिव ईश्वर श्रीवास ने कहा कि प्रदेश सरकर हर साल धान खरीदी के लिए एक ही समिति को तय करती है। वो लोग पिछले कई बार की तरह इस बार भई सरकार से मांग करते हैं कि किसी दूसरी एजेंसी को जिम्मेदारी देकर धान खरीदी कराई जाए। उन्होंने कहा कि धान की नमी सूखने के बाद जो शॉर्टेज आता है, तो सरकार के द्वारा कर्मचारियों पर दबाव बनाकर भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता है। ये पूरी तरह से गलत है।

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